शिक्षा विभाग की स्थानांतरण प्रक्रिया को लेकर घमासान, पदोन्नति समिति की बैठक ही नहीं हो सकी

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  • उपाध्यक्ष, शिक्षा सभापति एवं सीईओ के बीच ‘लेटर वार’ 

अकोला. जिला परिषद के शिक्षा विभाग की स्थानांतरण प्रक्रिया को लेकर उपाध्यक्ष, शिक्षा सभापति एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी के बीच ‘लेटर वार’ छिड़ गया. पदोन्नति प्रक्रिया की फाइल उपाध्यक्ष द्वारा उनके ही पास रखे जाने से पदोन्नति समिति की बैठक ही नहीं हो सकी. सीईओ द्वारा उपाध्यक्ष को दिए गए पत्र में पदोन्नति प्रक्रिया के अपूर्ण रह जाने लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया गया है. इसके जवाब में उपाध्यक्ष द्वारा शिक्षणाधिकारी को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि वे पदोन्नति का विरोध नहीं करते पर उन्हें इस प्रक्रिया की जानकारी होना आवश्यक है. इस पत्र की एक प्रति उपाध्यक्ष ने सीईओ को भी भेजी है. 

पिछले कई दिनों से जिप के शिक्षा विभाग द्वारा विभिन्न संवर्गों की पदोन्नति प्रक्रिया चलाई जा रही है. इस प्रक्रिया के प्रस्ताव शिक्षा विभाग के माध्यम से तैयार किए गए व सामान्य प्रशासन एवं वित्त विभागों द्वारा प्रस्तावों की जांच कर उन्हें अंतिम स्वरूप दे दिया गया है. प्राथमिक शिक्षकों के स्थानांतरण से पहले पदोन्नति प्रक्रिया पूर्ण कर लेना जरूरी होने की वजह से पदोन्नति समिति की बैठक 30 मई को आयोजित की गई थी, मगर संबंधित फाइल 27 मई से ही उपाध्यक्ष एवं शिक्षा समिति सभापति सावित्रीबाई राठौड़ ने खुद के पास रख ली थी. इस वजह से 30 मई को समिति की बैठक नहीं हो सकी. 

संगठन क्या कदम उठाएंगे? 

सीईओ एवं उपाध्यक्ष के पत्र संगठनों के पदाधिकारियों तक पहुंच गए. कई बार संगठनों द्वारा स्थानांतरण प्रक्रिया निर्धारित अवधि में पूर्ण किए जाने की मांग की जाती है. इसके लिए पत्र-व्यवहार भी किया जाता है, मगर अब सत्ताधारियों एवं प्रशासन के बीच ही ‘लेटर वार’ के चलते यह प्रक्रिया खटाई में पड़ गई है. अब संगठन इस मामले में क्या कदम उठाएंगे, इस सवाल को लेकर सभी उत्सुक हैं.

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