अकोला में घटा जलसंचय, अधिकांश सिंचाई प्रकल्प 50% से नीचे, गर्मी बढ़ते ही गहराया पानी का संकट

Akola Water Crisis: महाराष्ट्र के अकोला जिले में अधिकांश सिंचाई प्रकल्पों में जलसंचय 50 प्रतिशत से नीचे पहुंच गया है और कई नदियां सूख चुकी हैं।
akola water storage level drop summer water crisis irrigation projects
Akola Irrigation Projects (सोर्सः सोशल मीडिया)
Updated on

Akola Irrigation Projects: गर्मी के मौसम में जलसंचय हमेशा चिंता का विषय रहता है। अकोला जिले में भी यही स्थिति बन रही है। अधिकांश सिंचाई प्रकल्पों में जलसंचय 50 प्रतिशत से कम रह गया है और कई नदियां सूख चुकी हैं। बढ़ते तापमान से बाष्पीभवन तेज हो गया है, वहीं नियमित पानी के उपयोग से जलसंचय और घट रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की कमी महसूस होने लगी है। जिले में कुल 2 बड़े, 4 मध्यम और 24 लघु प्रकल्प हैं।

भौगोलिक क्षेत्र और जनसंख्या को देखते जलसंचय की व्यवस्था अपर्याप्त है। हर साल औसतन 700 से 800 मिमी बारिश होती है, लेकिन उसका संचयन और सिंचाई व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। परिणामस्वरूप गर्मी आते ही प्रकल्पों का जलस्तर तेजी से घटता है और पीने के पानी की समस्या गंभीर हो जाती है। इस वर्ष मार्च के अंत तक कई नदी-नाले सूख चुके हैं और जलसंचय घटने से कमी की स्थिति बन रही है।

जिले के प्रमुख जल प्रकल्प

जिले में काटेपूर्णा और वान दो बड़े प्रकल्प है। इसी तरह मोर्णा, निर्गुणा, उमा, घुंगशी (बैरेज) यह चार मध्यम प्रकल्प हैं। इसी तरह 24 लघु प्रकल्प में से अकोला, अकोट, तेल्हारा, मुर्तिजापुर, बालापुर सहित ग्रामीण क्षेत्रों की प्यास बुझती है और हजारों हेक्टेयर भूमि सिंचाई के अंतर्गत आती है। हालांकि, इन प्रकल्पों से सिंचाई की तुलना में पीने के पानी का उपयोग अधिक होता है।

और गंभीर हो सकती स्थिति

इस तरह अकोला जिले में जलसंचय लगातार घट रहा है। गर्मी बढ़ने के साथ बाष्पीभवन और पानी के अधिक उपयोग से स्थिति और गंभीर हो सकती है। मार्च के अंत तक कई नदी-नाले सूख चुके है और ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की कमी का असर दिखने लगा है। प्रशासन की अब जलसंवय प्रकल्पों के संरक्षण और जल वितरण की योजना पर विशेष ध्यान देना होगा, ताकि आने वाले महीनों में नागरिकों और किसानों को पानी की कमी का सामना न करना पड़े।

Navbharat Live
navbharatlive.com