

Akola Shri Ram Maharaj Centenary News: अकोला संत संसार की खुशहाली के लिए धरती पर अवतरित होते हैं, वे प्रभु के सेवक होते हैं और जग पर उपकार करने के लिए ही उनका कार्य होता है। लोकसंग्रह, जनता का कल्याण उनका स्थायी गुण होता है ज्ञान, भक्ति और वैराग्य के अनुसार वे यह लोकसंग्रह करते रहते हैं।
ऐसे पावन संतों के अनुग्रह से जीवन शांति से भरपूर और सद्गति की ओर बढ़ता है तथा संतों के माध्यम से भगवान का अनुग्रह मनुष्य को प्राप्त होता है, यह हितोपदेश ज्ञानेश्वर महाराज कदम ने दिया। श्री गुरु श्रीराम महाराज मेहुणकर की शताब्दी महोत्सव के अवसर पर निंबा फाटा परिसर स्थित अंत्री, मलकापुर में आयोजित राज्यस्तरीय कीर्तन महोत्सव में वारकरी भूषण, छोटी माऊली ज्ञानेश्वर महाराज कदम ने कीर्तन का छठा पुष्प प्रस्तुत किया।
संतांच्या माथा चरणावरी, साष्टांग हे करी दंडवत इस तुकोबा के अभंग पर आधारित कथन से उन्होंने संतों के चरणों में दंडवत करने से मिलनेवाले आनंद, हृदय में विकसित होने वाले प्रेमसुख और कृपा से होने वाले उद्धार की गहन व्याख्या की। कीर्तन के आरंभ में ज्ञानेश्वर महाराज कदम ने वै। श्रीराम महाराज के जीवन पर प्रकाश डाला।
सबसे पहले कृष्ण महाराज मेहुणकर और अन्य संतों की उपस्थिति में ज्ञानेश्वर महाराज कदम का स्वागत किया गया। कीर्तन महोत्सव में करीब दस हजार स्त्रीपुरुष भक्तों के लिए अलग-अलग बैठने की व्यवस्था की गई है।
राज्यस्तरीय इस कीर्तन महोत्सव का लाभ लेने के लिए दूरदूर से भक्तगण आ रहे हैं। टालकरी, मृदंगाचार्य आदि पंडाल में भीषण गर्मी के बावजूद उपस्थित हो रहे हैं और इस श्रीराम महाराज शताब्दी महोत्सव का आनंद ले रहे हैं।