Akola Birla Temple News: अकोला जीवन का प्रत्येक संघर्ष राम-रावण युद्ध के समान होता है और उसमें विजय प्राप्त करने के लिए दृढ़निश्चय, विवेक व समर्पण आवश्यक है। रामत्व को जागृत किए बिना जीवन के संकटों पर विजय संभव नहीं, ऐसा प्रभावी प्रतिपादन डॉ. भूषण फडके ने किया।
स्थानीय जठारपेठ स्थित बिर्ला मंदिर में नीलेश देव मित्र मंडल द्वारा आयोजित संगीतमय श्रीरामकथा के पांचवें एवं अंतिम दिन का आयोजन उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। श्रीराम के जयघोष से पूरा परिसर गूंज उठा और श्रद्धालु भक्ति रस में तल्लीन हो गए।
डॉ. फडके ने युद्धकांड और उत्तरकांड के प्रसंगों की भावपूर्ण व्याख्या करते हुए कुंभकर्ण व इंद्रजीत वध, रावण वध, सीता का अग्निदिव्य, श्रीराम का अयोध्या आगमन और रामराज्य की स्थापना के माध्यम से सत्य की विजय और अहंकार के अंत का संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि रामराज्य केवल शासन व्यवस्था नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में संतुलन, कर्तव्य और नैतिकता का उत्सव है। छत्रपति शिवाजी महाराज के हिंदवी स्वराज्य की स्थापना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि श्रीराम के आदर्शों से प्रेरित होकर स्वराज्य की नींव रखी गई, वहीं संभाजी महाराज ने बलिदान देकर धर्म की रक्षा की।
कार्यक्रम में वैशाली फडके, देवाशीष फडके और निखिल देशमुख ने भक्तिगीतों की प्रस्तुति दी। हार्दिक दुबे (तबला), सुमंत तरालकर (झांज) और विघ्नेश बोकसे (मृदंग) ने सशक्त संगत दी।
समापन अवसर पर नगरसेवक नीलेश देव के हाथों डॉ. फडके एवं सभी कलाकारों का सम्मान किया गया। कार्यक्रम में जयंतराव सरदेशपांडे, राजेंद्र गुन्नलवार, दिलीपराव देशपांडे, अजय शास्ती, गणेशराव मैराल, प्रकाश जोशी, शैलेश देव, विजय वाघ, मनीष अभ्यंकर, आशु यादव, नीलेश दुधलम, नरेंद्र परदेशी सहित मंडल के पदाधिकारी उपस्थित थे।
डॉ. फडके ने कहा कि रावण अहंकार, लोभ और अन्याय का प्रतीक है, जबकि राम सत्य, संयम और कर्तव्य का। जीवन के प्रत्येक संघर्ष में रामत्व को विजयी बनाना ही सच्ची सफलता है। हनुमान द्वारा संजीवनी लाने के प्रसंग से उन्होंने संकट में धैर्य, त्वरित निर्णय और निःस्वार्थ सेवा का महत्व बताया, वहीं सीता के अग्निदिव्य से आत्मसम्मान और सत्य की शक्ति का संदेश दिया। उत्तरकांड के प्रसंगों के माध्यम से उन्होंने त्याग और कर्तव्य को जीवन का आधार बताया।