अकोला की हर तहसील में बनेंगे दुग्ध क्लस्टर, दूध उत्पादन बढ़ाने की बनी रणनीति

Akola Milk Cluster: अकोला को दुग्ध उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए हर तहसील में 'दुग्ध क्लस्टर' स्थापित करने और सहकारी संस्थाओं को मजबूत करने का निर्णय लिया गया है।
Dairy Farming Development Akola
जिलाधिकारी कार्यालय में जिला प्रशासन तथा विभिन्न संबंधित विभागों की महत्वपूर्ण बैठक (सोर्स - फोटो)
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Dairy Farming Development Akola: अकोला जिले में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देकर आत्मनिर्भरता हासिल करने के उद्देश्य से जिला दूध उत्पादक सहकारी संस्थाओं, जिला प्रशासन तथा विभिन्न संबंधित विभागों की महत्वपूर्ण बैठक जिलाधिकारी कार्यालय में आयोजित की गई। बैठक में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए अच्छी नस्ल के दुधारू पशु, गुणवत्तापूर्ण चारे की व्यवस्था तथा दूध उत्पादकों को सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया।

साथ ही पशुसंवर्धन विभाग और संबंधित सभी यंत्रणाओं को जिला दूध उत्पादक संघ के साथ समन्वय स्थापित कर प्रत्येक तहसील में दुग्ध उत्पादन के क्लस्टर तैयार करने के निर्देश दिए गए।

मुर्तिजापुर के विधायक हरीश पिंपले की पहल पर आयोजित इस बैठक में जिलाधिकारी वर्षा मीणा, जि.प. के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अनय नावंदर, जिला दूध उत्पादक संघ के प्रशांत हजारी, शिवा मोहोड, नाना भिसे तथा जिला दुग्ध व्यवसाय विकास अधिकारी डी.जे. सोलंके सहित संघ और संस्थाओं के सदस्य, कृषि विभाग, नाबार्ड तथा विदर्भ मराठवाड़ा दुग्ध विकास परियोजना के अधिकारी उपस्थित थे।

जिले में 1.59 लाख किलो दूध उत्पादन

पशुसंवर्धन विभाग की उपलब्ध जानकारी के अनुसार जिले में प्रजनन क्षमता वाली देशी गाय, संकरित गाय और भैंसों की कुल संख्या 1,10,051 है, जिनमें से 34,737 दुधारू पशु हैं। जिले में प्रतिदिन लगभग 1,59,024 किलोग्राम दूध का उत्पादन होता है। इसके बावजूद जिले में - बाहरी क्षेत्रों से बड़ी मात्रा में दूध की आपूर्ति की जाती है। जलगांव से विकास दूध - 16,200 लीटर, संगमनेर (अहिल्यानगर) से राजहंस दूध 9,400 लीटर, बोदवड से अमर दूध 20,200 लीटर, नागपुर से दिनशॉ 14,000 लीटर तथा मदर डेयरी का 7,000 लीटर दूध प्रतिदिन अकोला पहुंचता है। इसके अलावा शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में गवली पद्धति के अनुसार घर-घर दूध वितरण की मात्रा लगभग 2 से 3 लाख लीटर प्रतिदिन होने का अनुमान है।

सहकारी संस्थाओं का सशक्तीकरण आवश्यक

पिंपल् बैठक में विधायक हरीश दिं धिकारी अकोल पिपले ने कहा कि जिले की दूध उत्पादक सहकारी संस्थाएं कई समस्याओं का सामना कर रही है, इसलिए उनका सशक्तीकरण आवश्यक है। उन्होंने 50 प्रतिशत अनुदान पर दुधारू पशुओं का वितरण, चारा विकास कार्यक्रम को प्रभावी रूप से लागू करने तथा संस्थाओं द्वारा एकत्रित संपूर्ण दूध ब प्रक्रिया एवं वितरण जिला दूध उत्पादक संघ के माध्यम से करने पर बल दिया।

उन्होंने पशुसंवर्धन, दुग्ध विकान कृषि विभाग एवं अन्य संबंधित विभागों को समन्वय बनाकर काम करने तथा दुग्ध उत्पादक किसानों को अधि से अधिक सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के निर्देश दिए।

गांव-गांव तक पहुंचे योजनाओं की जानकारी

बैठक में सरकार की नर पारडू संगोपन संवर्धन योजना सहित अन्य योजनाओं की जानकारी दुग्ध उत्पादकों तक पहुंचाने, बेहतर नस्ल के दुधारू पशुओं की उपलब्धता बढ़ाने और किसानों के लिए जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित करने पर चर्चा हुई। जिलाधिकारी वर्षा मीणा ने कहा कि दूध उत्पादक संस्थाओं को मजबूत करना, शीतकरण केंद्रों को प्रोत्साहन देना, दूध संकलन मार्ग तैयार करना तथा मजबूत शीत श्रृंखला विकसित करना समय की आवश्यकता है।

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