अकोला जिले में 5.70 लाख मीट्रिक टन चारा उपलब्ध; एलनिनो के खतरे को देख प्रशासन ने शुरू की बचाव की तैयारी
Akola Fodder Availability News: जिले में 5 लाख 70 हजार मीट्रिक टन चारा उपलब्ध है, जो तीन महीने तक पर्याप्त रहेगा। आपदा निवारण निधि से चारा बीज खरीद को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं।
चारा (प्रतीकात्मक तस्वीर -फोटो नवभारत)
Akola Animal Husbandry News: अकोला संभावित कमजोर मानसून को देखते हुए जिले में पशुधन की सुरक्षा और चारा संकट से निपटने के लिए प्रशासन ने तैयारी शुरू कर दी है। वर्तमान में जिले में लगभग 5 लाख 70 हजार मीट्रिक टन चारा उपलब्ध है, जो अनुमानतः अगले तीन महीने तक पर्याप्त रहने की संभावना है।
पशुसंवर्धन विभाग के अनुसार जिले में कुल 3,91,202 पशुधन हैं, जिनमें सबसे अधिक अकोला तालुका में 86,983 पशुधन दर्ज किए गए हैं। अन्य तालुकों में अकोट (57,369), बालापुर (51,780), बार्शीटाकली (48,049), मुर्तिजापुर (48,420), पातुर (48,076) और तेल्हारा (50,525) पशुधन शामिल हैं।
मौसम विभाग ने इस वर्ष एल नीनो (El Niño) के प्रभाव के कारण बारिश कम होने की आशंका जताई है, जिससे चारा संकट गहराने की संभावना है। इस स्थिति से निपटने के लिए जिलों को आपदा निवारण निधि से चारा बीज खरीद को प्राथमिकता देने के निर्देश जारी किए गए हैं। मक्का, ज्वार और बाजरा जैसे चारा बीज महाराष्ट्र राज्य बीज महामंडल (महाबीज) के माध्यम से उपलब्ध कराए जाएंगे।
सम्बंधित ख़बरें
बड़ी खुशखबरी! अब डिग्री के लिए नहीं करना होगा दीक्षांत समारोह का इंतज़ार, डिजीलॉकर पर तुरंत मिलेगी मार्कशीट
भंडारा में 44 डिग्री का टॉर्चर: ट्रांसफार्मर को फुंकने से बचाने के लिए महावितरण ने लगाए कूलर, मशीनरी हुई बेहाल
Yavatmal News: वरिष्ठ नागरिकों के लिए हेल्थ केयर कैंप आयोजन, 150 से अधिक लोगों ने उठाया लाभ
भंडारा: 63 ग्राम पंचायत उपचुनावों के नतीजे घोषित; 13 सरपंच और 40 सदस्यों की जीत के साथ समर्थकों ने मनाया जश्न
पशुसंवर्धन उपायुक्त डॉ. नीता गोडगोबे के अनुसार, चारा उत्पादन बढ़ाने के लिए कई योजनाएं लागू की जा रही हैं। इनमें वैरण बीज वितरण, हाइड्रोपोनिक्स पद्धति से चारा उत्पादन, मिनी टीएमआर (टोटल मिक्स्ड रेशन) और कडबाकुट्टी मशीनों का वितरण शामिल है।
ये भी पढ़े:- गोंदिया में संत गाडगेबाबा ग्राम स्वच्छता अभियान का जिला स्तरीय निरीक्षण शुरू; तिरखेड़ी से हुई मिशन की शुरुआत
गर्मी से बचाव के लिए सुझाव
अकोला भीषण गर्मी को देखते हुए पशुपालकों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। पशुओं को सुबह और शाम के समय ही चराने के लिए छोड़ें। गोठों को ऊंचा और हवादार रखें, छत पर सफेद रंग या चूना लगाएं और आसपास पेड़ लगाकर छाया की व्यवस्था करें। गोठों में स्प्रिंकलर, पंखे और पानी के फवारे का उपयोग कर तापमान नियंत्रित रखें तथा पशुओं को पर्याप्त ठंडा पानी उपलब्ध कराएं।
भविष्य की योजना
आगे चलकर बांधों के गाद क्षेत्र और नदी किनारों पर चारा उत्पादन की विशेष मुहिम चलाई जाएगी। साथ ही मुरघास (साइलेंज) परियोजनाओं को गति देकर भविष्य में चारा छावनियों की जरूरत को कम करने का लक्ष्य रखा गया है।
