हाईकोर्ट से अकोला जिला बैंक संचालक को झटका;एट्रोसिटी केस में FIR रद्द करने की अर्जी खारिज; चलेगा नियमित मुकदमा

Akola District Bank Dilip Jadhav Atrocity Case: बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने अकोला जिला बैंक संचालक दिलीप जाधव की एट्रोसिटी मामले में FIR और आरोपपत्र रद्द करने की याचिका खारिज कर दी।
Nagpur Bench Bombay High Court SC ST Act
अकोला जिला बैंक संचालक को हाई कोर्ट से झटका, FIR रद्द करने की मांग खारिजसोर्स: सोशल मीडिया
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Nagpur Bench Bombay High Court SC ST Act: बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने अकोला जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के संचालक दिलीप रामभाऊ जाधव की FIR और आरोपपत्र रद्द करने की मांग खारिज कर दी। अदालत ने मामले की नियमित सुनवाई जारी रखने का आदेश दिया है।

हाई कोर्ट ने FIR रद्द करने से किया इनकार

पुराने राजनीतिक विवाद से जुड़े किसान के साथ मारपीट और कथित जातिसूचक गाली-गलौज के मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अकोला जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के संचालक और मालेगांव पतसंस्था के अध्यक्ष दिलीप रामभाऊ जाधव की ओर से दाखिल याचिका को अदालत ने खारिज कर दिया।

न्यायमूर्ति एमडब्ल्यू चांदवाणी की एकलपीठ ने FIR और आरोपपत्र रद्द करने से इनकार करते हुए जाधव के खिलाफ मामले की नियमित सुनवाई जारी रखने का आदेश दिया।

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2020 की घटना से जुड़ा है मामला

मामला वाशिम जिले की मालेगांव तहसील के नगरतास गांव का है। शिकायतकर्ता किसान महादेवराव खडसे के अनुसार, 19 जून 2020 को गांव के बाहर कुछ लोगों ने कार और स्कॉर्पियो से उनका रास्ता रोक लिया था।

शिकायत में आरोप लगाया गया कि आरोपियों ने उन्हें घेर लिया और इसी दौरान दिलीप जाधव ने उनके सिर पर पत्थर से वार किया। शिकायतकर्ता ने अन्य आरोपियों पर ब्लेड से पीठ पर हमला करने, गला दबाने का प्रयास करने और जातिसूचक गालियां देने के भी आरोप लगाए हैं।

कई धाराओं में दर्ज हुई थी FIR

शिकायत के आधार पर मालेगांव पुलिस थाने में भारतीय दंड संहिता की धारा 307, 294, 506, 341 और 143 समेत विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। इसके अलावा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराएं भी लगाई गई थीं।

मामले की जांच के बाद पुलिस ने आरोपपत्र दाखिल किया था। इसके बाद दिलीप जाधव ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर FIR और आरोपपत्र को रद्द करने की मांग की थी।

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अब नियमित रूप से चलेगा मुकदमा

बॉम्बे हाई कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए मामले की नियमित कानूनी प्रक्रिया जारी रखने का निर्देश दिया है। अदालत के इस फैसले के बाद जाधव के खिलाफ दर्ज मामले में आगे की सुनवाई का रास्ता साफ हो गया है। आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्धारण ट्रायल के दौरान साक्ष्यों के आधार पर होगा।

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