अकोला: 'भीमगर्जना' के सुरों से महामानव को दी गई मानवंदना, कुणाल और किरण वाकोडे की प्रस्तुतियों ने बांधा समां

अकोला में सांस्कृतिक कार्य विभाग द्वारा 'भीमगर्जना' कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कलाकारों ने बुद्ध वंदना और भीम गीतों के माध्यम से डॉ. आंबेडकर के विचारों को प्रस्तुत किया।
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Akola Bhimgarjana Ambedkar Jayanti News: अकोला भीमराव रामजी आंबेडकर की जयंती के अवसर पर सांस्कृतिक कार्य विभाग एवं सांस्कृतिक कार्य संचालनालय द्वारा “भीमगर्जना” नामक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रमिलाताई ओक सभागृह में आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से महामानव को संगीतमय मानवंदना अर्पित की गई।

शब्द और सुरों से सजी यह सुरम्य प्रस्तुति डॉ. आंबेडकर के जीवन कार्य को नमन करने के साथ-साथ समता, बंधुता और सामाजिक परिवर्तन के विचारों का प्रभावी संदेश देने वाली सिद्ध हुई।

कार्यक्रम में संचालनालय के वसंत खडसे, पियूष गायधने, हर्षवर्धन पवार, प्रा. मधु जाधव, विष्णु निंबालकर, समन्वयक सचिन गिरी तथा सह-समन्वयक अक्षय पिंपलकर की उपस्थिति रही।

गायक कुणाल वाकोडे और किरण वाकोडे ने अपनी सुमधुर प्रस्तुतियों से कार्यक्रम में विशेष आकर्षण पैदा किया। किरण वाकोडे ने बुद्ध वंदना से कार्यक्रम की शुरुआत की, जिसके पश्चात “साजरी भीमजयंती करू”, “भीमा तुज प्रणाम कोटी कोटी”, “माझ्या भीमाची पुण्याई”, “नऊ कोटी लेकरांची माय पाहिली” और “लई बळ आलं माझ्या दुबळ्या पोरात” जैसे भावपूर्ण भीम गीत प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम में कलाकारों ने संगीत और सादरीकरण के माध्यम से डॉ. आंबेडकर के सामाजिक परिवर्तन में योगदान का सशक्त चित्रण किया। वाद्य संगत में सचिन जाधव (गिटार), जानराव बहाले (बांसुरी व क्लैरिनेट), जयकुमार गुरु (कीबोर्ड), विशाल इंगले (ढोलक), कार्तिक चंडाले (ढोल), नितिन गुरु (ऑक्टोपैड) तथा अनिकेत अंबुसकर (तबला) ने प्रभावी प्रस्तुति दी।

कार्यक्रम का संचालन माणिकराव वानखडे ने किया, जबकि आकाश वानखडे और प्रतीक आंबेकर ने कोरस कलाकार के रूप में सहभागिता निभाई।

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