अकोला: ऑटो रिक्शा चालकों का हल्लाबोल; 'कल्याणकारी मंडल' के अनिवार्य शुल्क के खिलाफ आरटीओ कार्यालय पर प्रदर्शन

महाराष्ट्र में ऑटो रिक्शा चालकों ने जबरन शुल्क वसूलने के खिलाफ आरटीओ कार्यालयों में सामूहिक निवेदन दिया।
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Akola Auto Rickshaw Protest News: राज्य सरकार द्वारा ऑटो रिक्शा चालकों पर प्रस्तावित शुल्क के विरोध में संगठनों का आंदोलन तेज हो गया है। महाराष्ट्र ऑटो रिक्शा चालक-मालक संगठन संयुक्त कृति समिति ने इस निर्णय को अन्यायकारक बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की है।

समिति के अकोला जिलाध्यक्ष शाकीर खान ने बताया कि मुंबई के गिरगांव में हुई बैठक में राज्यभर के पदाधिकारियों ने एकमत से निर्णय लिया कि रिक्शा चालकों से किसी भी प्रकार का शुल्क या दंड स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसी के तहत सोमवार को अकोला सहित राज्य के सभी जिलों में आरटीओ कार्यालयों के समक्ष निषेध दर्ज कर सामूहिक निवेदन सौंपा जाएगा।

बैठक में यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया कि ‘धर्मवीर आनंद दिघे महाराष्ट्र ऑटो रिक्शा व मीटर्ड टैक्सी चालक कल्याणकारी मंडल’ के पंजीकरण के लिए 500 रुपये प्रवेश शुल्क और 300 रुपये वार्षिक शुल्क अनिवार्य किया गया है, जिसे संगठन ने गलत ठहराया है।

संगठनों का आरोप है कि आरटीओ कार्यालयों में चालकों पर जबरन पंजीकरण का दबाव बनाया जा रहा है। पंजीकरण न कराने पर परमिट नवीनीकरण और वाहन पासिंग जैसी सेवाएं रोकने की धमकी दी जा रही है, जिसे गैरकानूनी बताया गया है।

साथ ही, सरकार द्वारा ऑटो रिक्शा लाइसेंस वितरण पर स्थगन लगाए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं, जबकि इलेक्ट्रिक ऑटो और ई-रिक्शा के पंजीकरण पर ऐसी कोई रोक नहीं है।

प्रमुख मांगें

  • 500 रुपये प्रवेश शुल्क और 300 रुपये वार्षिक शुल्क का निर्णय तत्काल रद्द किया जाए
  • आरटीओ कार्यालयों में जबरन पंजीकरण का दबाव बंद किया जाए
  • इलेक्ट्रिक ऑटो और ई-रिक्शा के पंजीकरण पर भी समान नीति लागू की जाए

संगठनों ने चेतावनी दी है कि मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

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