शिर्डी में रक्षा एवं अंतरिक्ष हब की शुरुआत, राजनाथ सिंह बोले- निजी कंपनियां अब हथियार निर्माण में अहम
Shirdi Defence Space Complex Update: शिर्डी में रक्षा एवं अंतरिक्ष परिसर के उद्घाटन के दौरान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि शिर्डी अब आस्था के साथ-साथ शक्ति का भी केंद्र बन रहा है।
- Written By: अपूर्वा नायक
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सीडीएस अनिल चौहान (सौ. एक्स )
Shirdi Defence Space Complex News: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शनिवार को शिर्डी में रक्षा एवं अंतरिक्ष परिसर के उद्घाटन के दौरान कहा कि शिर्डी अब केवल आस्था का नहीं, बल्कि ‘शक्ति’ का भी प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में भक्ति और शक्ति दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं।
फडणवीस ने कहा कि शिर्डी अब शक्ति के केंद्र के रूप में उभरा है। यह अत्यंत प्रसन्नता का विषय है। भक्ति और शक्ति भारतीय आध्यात्मिकता में समाहित हैं। केवल शक्तिशाली ही शांति स्थापित कर सकते हैं, कमजोर कभी शांति स्थापित नहीं कर सकते।
मुख्यमंत्री ने कहा कि रक्षा परिसर की स्थापना से शिर्डी को नई पहचान मिलेगी और यह क्षेत्र देश के रक्षा एवं अंतरिक्ष क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने इसे महाराष्ट्र और देश के लिए गौरव का विषय बताया।
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राज्य में ईंधन संकट और ग्रामीण क्षेत्रों में डीजल की कमी को लेकर भी मुख्यमंत्री ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि किसानों को डीजल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सभी जिलाधिकारियों और संभागीय आयुक्तों को निर्देश दिए गए हैं।
फडणवीस ने चेतावनी देते हुए कहा कि किसानों के नाम पर ईंधन की कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि राज्य के कुछ हिस्सों में पेट्रोल और डीजल की बिक्री में 20 से 30 प्रतिशत तक अचानक वृद्धि दर्ज की गई है। एशिया संकट के कारण संभावित ईंधन आपूर्ति बाधित होने की आशंका के बीच महाराष्ट्र में पेट्रोल और डीजल की मांग तेजी से बढ़ी है, जिससे कई जिलों में ईंधन की कमी की स्थिति बन गई है।
रक्षा क्षेत्र में प्राइवेट कंपनियों की भूमिका अब सिर्फ नट-बोल्ट तक सीमित नहीं: राजनाथ सिंह
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि रक्षा क्षेत्र में निजी कंपनियों की भूमिका अब सिर्फ नट-बोल्ट बनाने तक सीमित नहीं, बल्कि अब हम न सिर्फ अपनी जरूरत के सभी हथियार बना रहे हैं और इसमें बड़ी महत्त्वपूर्ण भूमिका निजी क्षेत्र की कंपनियां निभा रही हैं।
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि रक्षा क्षेत्र में निजी कंपनियों की भूमिका अब सिर्फ नट-बोल्ट बनाने तक सीमित नहीं। बल्कि अब हम न सिर्फ अपनी जरूरत के सभी हथियार बना रहे हैं और इसमे बड़ी महत्त्वपूर्ण भूमिका निजी क्षेत्र की कंपनियां निभा रही है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि आज का कार्यक्रम, एक नहीं, दो नहीं, बल्कि कई ‘मील के पत्थर’ स्थापित करनेवाला है। पहला तो यह कि तोप के गोले बनानेवाले एक आधुनिक कारखाने का उद्घाटन हो रहा है, जिसकी वार्षिक क्षमता पांच लाख शेल्स बनाने की होगी। दूसरा, यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चिंग सिस्टम से जुड़े मिसाइल कॉम्प्लेक्स की आधारशिला रखी जा रही है।
तीसरा, अमरीकी कंपनी ब्लैक स्काई के साथ एक ऐसा समझौता किया जा रहा है, जो सैटेलाइट एसेंबलिंग की दिशा में हमारी प्राइवेट इंडस्ट्री को अंतरिक्ष की ऊंचाइयों तक ले जाएगा। सिंह ने कहा कि आज जिस प्लांट का उद्घाटन हो रहा है, वह एडवांस्ड एक्सप्लोजिव्स, आरडीएक्स एवं आधुनिक प्रोपल्सन तकनीक पर आधारित होगा। इसलिए यह प्लांट हमारे सशस्त्र बलों की जरूरतों को पूरा करते हुए भारत के रक्षा उद्योग को मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
भविष्य के युद्ध होंगे हाईटेक : अनिल चौहान
प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल अनिल चौहान ने शनिवार को कहा कि भविष्य के युद्ध बहु-क्षेत्रीय होंगे, जहां लड़ाइयां भूमि, समुद्र, वायु और साइबर क्षेत्र के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक तरीके से भी लड़ी जाएंगी। अहिल्यानगर जिले के शिर्डी में एक रक्षा विनिर्माण इकाई के उद्घाटन के अवसर पर जनरल चौहान ने कहा कि आधुनिक युद्ध केवल जनशक्ति, पारंपरिक हथियारों या प्लेटफॉर्म-केंद्रित अभियानों पर आधारित नहीं हैं।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), ड्रोन, रोबोटिक्स, साइबर प्रणालियां, स्वायत्त प्लेटफॉर्म, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, सटीक मारक क्षमता वाले हथियार और सूचना प्रभुत्व भविष्य के युद्धों को निर्णायक आकार देंगे। जनरल चौहान ने कहा कि प्रौद्योगिकी, गति और नवाचार आने वाले दिनों में अभियानों की सफलता के लिए महत्वपूर्ण निर्धारक तत्व होंगे।
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भविष्य के युद्ध बहु-क्षेत्रीय होंगे, जहां लड़ाइयां भूमि, समुद्र, वायु और साइबर क्षेत्र के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक तरीके से भी लड़ी जाएंगी। भविष्य में युद्धक्षेत्र भौगोलिक स्थान तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि सूचना नेटवर्क, डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र और साइबर बुनियादी ढांचे तक फैलेंगे।
