MP हाईकोर्ट ने सरकारी सर्कुलर को किया निरस्त! अब सीनियरिटी नहीं योग्यता से बनेंगे प्राचार्य, जानें पूरा मामला

Madhya Pradesh News: अल्पसंख्यक संस्थानों को मिला प्राचार्य चुनने का अधिकार। MP हाईकोर्ट ने वरिष्ठता आधारित सरकारी नियम को किया रद्द। स्वायत्तता पर ऐतिहासिक फैसला।
Mp high court gwalior decision minority institutions principal appointment rights
एमपी हाईकोर्ट ग्वालियर खंडपीठ (सोर्स- सोशल मीडिया)
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MP High Court Historical Verdict: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर युगल पीठ ने अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के अधिकारों को लेकर अहम और ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है। एक सुनवाई के दौरान अदालत ने गुरुवार को साफ कहा कि किसी भी अल्पसंख्यक संस्थान जो सहायता प्राप्त है उसे अपने प्राचार्य या प्रभारी प्राचार्य के चयन का पूर्ण संवैधानिक अधिकार है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि सरकार इन संस्थानों पर वरिष्ठता आधारित नियम लागू करने के लिए बाध्य नहीं कर सकती।

बता दें कि सुनवाई के दौरान पीठ ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी भी शिक्षण संस्थान में प्राचार्य की भूमिका बेहद अहम होती है क्योंकि वही अनुशासन, प्रशासन और शिक्षा की गुणवत्ता तय करता है। ऐसे में संस्थान को यह अधिकार होना चाहिए कि वह अपनी जरूरत और योग्यता के आधार पर नेतृत्व का चयन करे भले ही चयनित व्यक्ति सबसे वरिष्ठ न हो।

अदालत ने सरकारी सर्कुलरों को किया निरस्त

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने 25 अगस्त 2021 और 8 सितंबर 2021 को जारी उन सरकारी सर्कुलरों को अल्पसंख्यक संस्थानों के लिए निरस्त कर दिया है, जिनमें वरिष्ठतम अध्यापक को ही प्रभारी बनाने का प्रावधान था। साथ ही यह भी साफ किया गया कि जब प्रबंधन किसी योग्य उम्मीदवार का चयन कर ले, तो उसकी उपयुक्तता पर सरकार या अदालत को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।

कॉलेज नियुक्ति विवाद की वजह से बढ़ा मामला

वरिष्ठ अधिवक्ता एमपीएस रघुवंशी के अनुसार, यह विवाद मध्य प्रदेश के विदिशा स्थित एसएसएल जैन पीजी कॉलेज से शुरू हुआ। कॉलेज की प्रभारी प्राचार्य डॉ. शोभा जैन के सेवानिवृत्त होने के बाद प्रबंधन समिति ने डॉ. एसके उपाध्याय को प्रभारी प्राचार्य नियुक्त किया। हालांकि, शासन के क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक ने इस निर्णय को रद्द कर वरिष्ठता के आधार पर डॉ. अर्चना जैन को प्रभार सौंपने का आदेश जारी कर दिया। प्रबंधन ने इसे अपनी स्वायत्तता में हस्तक्षेप बताते हुए मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में चुनौती दी।

हाईकोर्ट ने बदला पूरा फैसला

मामले की प्रारंभिक सुनवाई में सिंगल बेंच ने शासन के पक्ष में फैसला सुनाया था लेकिन बाद में ग्वालियर की युगल पीठ ने उस आदेश को पूरी तरह पलट दिया। अदालत ने प्रबंधन के अधिकार को सही ठहराते हुए उसके निर्णय को वैध माना।

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