उज्जैन में महंगी हुई शक्कर: 20 दिन में 8-10 रुपये प्रति किलो बढ़े दाम, त्योहारी सीजन में पड़ेगी जेब पर मार

Ujjain News : उज्जैन में शक्कर के दाम 20-25 दिनों में 8-10 रुपये प्रति किलो तक बढ़ गए हैं। कम बारिश, घटते उत्पादन और एथेनॉल की बढ़ती मांग से त्योहारी सीजन में महंगाई बढ़ने की आशंका है।
Ujjain Sugar Price Hike
महंगी हुई शक्कर (फोटो सोर्स- नवभारत)
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Ujjain Sugar Price Hike: उज्जैन में त्योहारी सीजन से पहले आम आदमी की रसोई का बजट एक बार फिर बिगड़ने लगा है। पिछले 20 से 25 दिनों में शक्कर के दामों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। थोक कारोबारियों के अनुसार उत्पादन में कमी, महाराष्ट्र में कम बारिश और एथेनॉल की बढ़ती मांग के चलते चीनी महंगी हो रही है। इसका सीधा असर खुदरा बाजार और आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है।

उज्जैन होलसेल व्यापारी संघ के अध्यक्ष अजय अरोरा ने बताया कि मध्य प्रदेश में अधिकांश शक्कर की आपूर्ति महाराष्ट्र से होती है। इस वर्ष महाराष्ट्र में सामान्य से कम बारिश होने के कारण गन्ने की फसल प्रभावित हुई है, जिससे चीनी उत्पादन घटने की आशंका है। उन्होंने कहा कि आगामी नवंबर-दिसंबर के उत्पादन सीजन में भी उत्पादन कम रहने की संभावना है, जिसके चलते कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है।

थोक में 4850 रुपये क्विंटल बिक रही शक्कर

अजय अरोरा के मुताबिक, वर्तमान में उज्जैन की थोक मंडी में शक्कर करीब 4,850 रुपये प्रति क्विंटल बिक रही है। पिछले एक महीने में थोक कीमतों में करीब 8 से 10 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जहां पहले थोक बाजार में शक्कर 42 से 45 रुपये प्रति किलो मिल रही थी, वहीं अब यह 48 रुपये प्रति किलो के आसपास पहुंच गई है। खुदरा बाजार में यही शक्कर 51 से 52 रुपये प्रति किलो तक बिकने की संभावना है।

उत्पादन में कमी और मांग में बढ़ोतरी

उन्होंने बताया कि सरकार ने चीनी के निर्यात पर रोक लगा रखी है, लेकिन इसके बावजूद उत्पादन में कमी और मांग बढ़ने के कारण बाजार में कीमतें लगातार ऊपर जा रही हैं। इसके अलावा सरकार द्वारा एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देने की नीति का भी चीनी उत्पादन पर असर पड़ रहा है। चीनी मिलें गन्ने का अधिक उपयोग एथेनॉल बनाने में कर रही हैं, जिससे बाजार में चीनी की उपलब्धता प्रभावित हो रही है।

घरेलू बजट पर पड़ रहा असर

स्थानीय उपभोक्ताओं का कहना है कि शक्कर की बढ़ती कीमतों से घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। विशेष रूप से त्योहारी सीजन में मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने के कारण इसका असर और अधिक महसूस होगा। व्यापारियों का मानना है कि यदि उत्पादन में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले महीनों में चीनी की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है।

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