उज्जैन में निभाई गई सदियों पुरानी नगर पूजा की परंपरा; 26 किमी की यात्रा में करीब 40 मंदिरों में पूजन

Ujjain Ancient Ritual Of Worship: उज्जैन में महाअष्टमी पर नगर पूजा की परंपरा निभाई गई। कलेक्टर-SP ने चौबीस खंभा माता मंदिर में पूजन किया। इसके बाद 26 किमी की यात्रा में करीब 40 मंदिरों में पूजा की गई।
26 kilometre religious journey covering around 40 temples
कलेक्टर-एसपी ने चौबीस खंभा माता मंदिर में पूजन किया(सोर्स- सोशल मीडिया)
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HIGHLIGHTS:

  • उज्जैन में महाअष्टमी पर कलेक्टर-एसपी ने की पूजा-अर्चना।

  • चौबीस खंभा माता मंदिर से 26 किलोमीटर की नगर पूजा यात्रा शुरू

  • करीब 40 देवी-देवताओं के मंदिरों में पूजन।

  • गढ़कालिका माता मंदिर के बाद हांडी फोड़ भैरव मंदिर में संपन्न होगी परंपरा।

Ujjain Centuries Old Nagar Pooja Tradition: धार्मिक नगरी उज्जैन में शारदीय नवरात्रि की महाअष्टमी पर सदियों पुरानी नगर पूजा की परंपरा विधि-विधान के साथ निभाई गई। सोमवार सुबह चौबीस खंभा माता मंदिर में कलेक्टर रोशन कुमार सिंह और एसपी प्रदीप शर्मा ने मां महामाया एवं महालया की पूजा-अर्चना कर आरती की। इस दौरान माता को मदिरा अर्पित करने के साथ पारंपरिक पूजन सामग्री भी चढ़ाई गई। उज्जैन में शासन की ओर से आयोजित होने वाली यह नगर पूजा धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से विशेष महत्व रखती है। मान्यता है कि इस पूजा के माध्यम से नगर की सुख-समृद्धि और नागरिकों की खुशहाली की कामना की जाती है।

चौबीस खंभा माता मंदिर में पूजन संपन्न होने के बाद शासकीय नगर पूजा दल पारंपरिक यात्रा पर रवाना हुआ। ढोल-नगाड़ों के साथ निकली इस यात्रा में निर्धारित परंपरा के अनुसार मिट्टी की हांडी से मदिरा की धार बहाते हुए विभिन्न मंदिरों में पूजन किया गया। नगर पूजा का मार्ग लगभग 26 किलोमीटर का है। यात्रा के दौरान देवी और भैरव मंदिरों में मदिरा अर्पित की जाती है, जबकि हनुमान मंदिरों में ध्वजा चढ़ाने की परंपरा निभाई जाती है। कई स्थानों पर नगरवासियों ने पूजा दल का स्वागत भी किया।

करीब 40 देवी-देवताओं के मंदिरों में पूजन

नगर पूजा के दौरान शहर के करीब 40 देवी, भैरव और हनुमान मंदिरों में विधि-विधान से पूजा की जाती है। इनमें चामुंडा माता, भूखी माता, काल भैरव और चंड-मुंड नाशिनी सहित कई प्रमुख धार्मिक स्थल शामिल हैं। प्रत्येक मंदिर में पूजन और आरती के बाद दल अगले पड़ाव की ओर बढ़ता है। यह परंपरा उज्जैन नगर की प्राचीन धार्मिक मान्यताओं और लोक आस्था से जुड़ी हुई है। मान्यता के अनुसार, नगर पूजा का उद्देश्य नगर को अनिष्ट, महामारी और प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षित रखने के साथ जनकल्याण की कामना करना है।

प्रशासन की ओर से जुटाई जाती है पूजन सामग्री

नगर पूजा की तैयारियां जिला प्रशासन की देखरेख में की जाती हैं। इसके लिए मदिरा सहित विभिन्न पूजन सामग्रियों की व्यवस्था पहले से की जाती है। परंपरा के अनुसार, माता को चुनरी, सोलह श्रृंगार की सामग्री और बलबाकल का भोग अर्पित किया जाता है। बलबाकल तैयार करने के लिए काले चने और गेहूं उबाले जाते हैं। इसके साथ पूड़ी और भजिए भी बनाए जाते हैं। पूजन सामग्री जुटाने से लेकर यात्रा के संचालन तक राजस्व विभाग के पटवारी, कोटवार, कस्बा पटेल और अन्य संबंधित कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं।

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हांडी फोड़ भैरव मंदिर में पूरी होती है परंपरा

नगर पूजा यात्रा का समापन गढ़कालिका माता मंदिर में पूजन के बाद अंकपात क्षेत्र स्थित हांडी फोड़ भैरव मंदिर में किया जाता है। यहां परंपरागत रूप से हांडी फोड़ने के साथ यात्रा संपन्न होती है। इस तरह महाअष्टमी पर उज्जैन में सदियों से चली आ रही नगर पूजा की परंपरा के माध्यम से नगर की सुख-शांति, समृद्धि और जनकल्याण की कामना की गई। धार्मिक नगरी में यह आयोजन आज भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए है और स्थानीय आस्था के साथ गहराई से जुड़ा हुआ है।

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