हरि-हर के मिलन से धन्य हुई महाकाल की नगरी, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने की शाही सवारी की अगवानी

Mahakal Shahi Sawari Ujjain: बाबा महाकाल की भव्य शाही सवारी, गोपाल मंदिर में हुआ अद्भुत 'हरि-हर मिलन'। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पूजन-अर्चन कर निभाई 150 साल पुरानी पारिवारिक परंपरा।
Jyotiraditya Scindia welcomes Mahakal Shahi Sawari in Ujjain
बाबा महाकाल की सवारी (फोटो सोर्स सोशल मीडिया)
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Scindia Welcomes Mahakal Shahi Sawari: उज्जैन में भादों माह के अवसर पर बाबा महाकाल की दिव्य शाही सवारी परंपरा अनुसार धूमधाम और भव्यता के साथ निकली। सवारी के दौरान पूरा शहर भक्तिमय नजर आया। मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर पुष्पवर्षा और जयकारों के साथ पालकी का स्वागत किया। शाही सवारी जब ऐतिहासिक गोपाल मंदिर पहुंची तो यहां धार्मिक परंपराओं और राजसी गरिमा का अद्भुत संगम देखने को मिला। बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने।

गोपाल मंदिर पहुंचने पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बाबा महाकाल की पालकी की अगवानी की। उन्होंने विधि-विधान के साथ बाबा महाकाल का पूजन-अर्चन किया और भगवान से आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान मंदिर परिसर में धार्मिक मंत्रोच्चार और जयकारों से वातावरण गूंज उठा। सिंधिया परिवार की ओर से लंबे समय से चली आ रही इस परंपरा का निर्वहन पूरे श्रद्धाभाव और गरिमा के साथ किया गया। श्रद्धालुओं के लिए यह पल बेहद विशेष रहा।

गोपाल मंदिर में हुआ ‘हरि-हर मिलन’

बाबा महाकाल की शाही सवारी का गोपाल मंदिर पहुंचना उज्जैन की धार्मिक परंपराओं में विशेष महत्व रखता है। यहां भगवान शिव के स्वरूप बाबा महाकाल और भगवान विष्णु के स्वरूप भगवान द्वारकाधीश के बीच ‘हरि-हर मिलन’ की परंपरा निभाई जाती है। सनातन संस्कृति में शिव और विष्णु की एकात्मता का यह दृश्य धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस अद्भुत आयोजन को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचे और हरि-हर के मिलन के अलौकिक दर्शन किए।

सिंधिया ने याद किया पूर्वजों का योगदान

इस अवसर पर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने उज्जैन और सिंधिया राजवंश के ऐतिहासिक संबंधों को याद किया। उन्होंने कहा कि उज्जैन कभी सिंधिया स्टेट की राजधानी रहा है। उनके पूर्वज राणोजी महाराज ने मालवा में मराठाओं का भगवा ध्वज लहराया था। सिंधिया ने कहा कि आक्रांताओं द्वारा क्षतिग्रस्त किए गए महाकाल मंदिर के जीर्णोद्धार और बाबा महाकाल के ज्योतिर्लिंग की पुनर्स्थापना में उनके पूर्वजों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। इसके बाद महारानी बैजाबाई ने गोपाल मंदिर का निर्माण कराया, जिससे उज्जैन की धार्मिक पहचान को नई मजबूती मिली।

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डेढ़ सौ साल से निभाई जा रही परंपरा

सिंधिया ने कहा कि पिछले करीब डेढ़ सौ वर्षों से सिंधिया परिवार गोपाल मंदिर में बाबा महाकाल के चरण-वंदन की परंपरा निभाता आ रहा है। उन्होंने उज्जैन को भगवान महाकाल की नगरी बताते हुए कहा कि यहां होने वाले धार्मिक आयोजन देश की सनातन परंपराओं को जीवंत रखते हैं। शाही सवारी के दौरान उमड़ा जनसैलाब इस आस्था का प्रमाण रहा। सिंधिया ने बाबा महाकाल से देश और प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति और जनकल्याण की प्रार्थना की। हरि-हर मिलन के इस पावन अवसर ने एक बार फिर उज्जैन की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को देश-दुनिया के सामने जीवंत कर दिया।

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