Baba Mahakal Rajsi Sawari : उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर से बाबा महाकाल की श्रावण-भाद्रपद माह की अंतिम और प्रमुख राजसी सवारी सोमवार, 7 सितंबर को धूमधाम से निकलेगी। सावन की चार और भाद्रपद की दो सवारियों के बाद होने वाले इस अंतिम नगर भ्रमण को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह है। बाबा महाकाल की अगवानी के लिए पूरा शहर तैयार है। सवारी मार्ग पर जगह-जगह पुष्पवर्षा, भजन, बैंड-बाजे और धार्मिक आयोजनों के जरिए बाबा का स्वागत किया जाएगा।
बाबा महाकाल की राजसी सवारी शाम 4 बजे श्री महाकालेश्वर मंदिर से प्रारंभ होगी। सवारी से पहले मंदिर के सभामंडप में भगवान का विधिवत पूजन-अर्चन किया जाएगा। इसके बाद मंदिर के मुख्य द्वार पर सशस्त्र पुलिस बल द्वारा भगवान को गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाएगा। इस दौरान बाबा महाकाल छह अलग-अलग स्वरूपों में श्रद्धालुओं को दर्शन देंगे।
बाबा महाकाल राजसी सवारी में रजत पालकी पर श्री चंद्रमौलेश्वर, हाथी पर श्री मनमहेश, गरुड़ रथ पर श्री शिव तांडव, नंदी रथ पर श्री उमा-महेश, डोल रथ पर होल्कर स्टेट के मुखारविंद और षट्म सवारी में श्री सप्तधान के मुखारविंद शामिल रहेंगे। बाबा के इन स्वरूपों के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
राजसी सवारी महाकाल रोड, गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार, कहारवाड़ी और हरसिद्धि पाल होते हुए रामघाट पहुंचेगी। यहां मां क्षिप्रा के तट पर भगवान श्री चंद्रमौलेश्वर और गजराज पर विराजित श्री मनमहेश का पूजन-अर्चन और आरती होगी। इसके बाद सवारी रामानुजकोट, कार्तिक चौक, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, तेलीवाड़ा, कंठाल, सती गेट, सराफा और छत्री चौक होते हुए श्री गोपाल मंदिर पहुंचेगी।
श्री गोपाल मंदिर में परंपरानुसार सिंधिया स्टेट द्वारा बाबा महाकाल की पूजा-अर्चना की जाएगी। इसके बाद राजसी सवारी पटनी बाजार, गुदरी चौराहा और महाकाल चौराहा होते हुए वापस श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंचेगी। पूरे सवारी मार्ग पर श्रद्धालुओं के लिए दर्शन और सुरक्षा की व्यवस्थाएं की गई हैं।
राजसी सवारी के चल समारोह में 73 भजन मंडलियां शामिल होंगी। उज्जैन के साथ प्रदेश के अलग-अलग शहरों से पहुंचीं ये भजन मंडलियां भजनों के माध्यम से बाबा महाकाल का गुणगान करेंगी। सवारी में साधु-संत, गणमान्य नागरिक, पुलिस बैंड, नगर सेना और मंदिर के पुजारी-पुरोहित भी शामिल रहेंगे। आगे मजिस्ट्रेट वाहन, प्रचार वाहन, यातायात पुलिस, तोपची, रजत ध्वज, घुड़सवार और सलामी गार्ड समेत विभिन्न दल चलेंगे।
श्रद्धालुओं को सवारी के सुगम दर्शन कराने के लिए मंदिर प्रबंध समिति ने चलित रथ की व्यवस्था की है। रथ के दोनों ओर लगी एलईडी स्क्रीन से सवारी का लाइव प्रसारण किया जाएगा। फ्रीगंज, नानाखेड़ा और दत्त अखाड़ा सहित अन्य क्षेत्रों में भी लाइव प्रसारण की व्यवस्था रहेगी। सवारी में सांस्कृतिक दल प्रस्तुतियां देंगे और सिंहस्थ महापर्व 2028 की झांकी भी आकर्षण का केंद्र रहेगी।
प्रशासन ने श्रद्धालुओं से सवारी मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था में सहयोग करने की अपील की है। लोगों से सड़क की ओर भट्टी या तेल के कढ़ाव नहीं रखने, उल्टी दिशा में नहीं चलने और सिक्के, नारियल व फल आदि सवारी की ओर नहीं फेंकने को कहा गया है। सुरक्षा व्यवस्था के लिए एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड, विद्युत मंडल और पुलिस के वाहन भी सवारी के साथ रहेंगे।