

Ujjain Mahakal Temple: धार्मिक नगरी उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान श्री महाकालेश्वर मंदिर में शुक्रवार, 29 मई 2026 को ज्येष्ठ कृष्ण त्रयोदशी के पावन अवसर पर प्रातःकालीन भस्म आरती श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में संपन्न हुई। तड़के सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी और पूरा वातावरण “जय श्री महाकाल” के जयघोष से गूंज उठा।
प्रतिदिन की तरह शुक्रवार को भी प्रातः करीब 4 बजे मंदिर के कपाट खोले गए। इसके बाद विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान महाकाल का जल तथा पंचामृत से अभिषेक पूजन किया गया। पुजारियों द्वारा विशेष पूजा-अर्चना के पश्चात महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की गई। भस्म आरती के दौरान मंदिर का आध्यात्मिक और दिव्य वातावरण श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध करता रहा।
भस्म आरती के बाद भगवान महाकाल का मनमोहक और राजाधिराज स्वरूप में विशेष श्रृंगार किया गया। बाबा महाकाल को चंदन, अबीर, रजत आभूषण और सुगंधित पुष्पमालाओं से अलंकृत किया गया। आकर्षक मुकुट और दिव्य आभूषणों से सजे भगवान महाकाल के दर्शन कर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से आए श्रद्धालुओं ने भी चलित दर्शन व्यवस्था के माध्यम से बाबा महाकाल के दर्शन किए। श्रद्धालुओं ने परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और लोक कल्याण की कामना करते हुए पूजा-अर्चना की। मंदिर परिसर में सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए प्रशासन और मंदिर समिति की ओर से विशेष इंतजाम किए गए थे।
उज्जैन में प्रतिदिन होने वाली बाबा महाकाल की भस्म आरती का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व देशभर में प्रसिद्ध है। मान्यता है कि बाबा महाकाल की भस्म आरती के दर्शन मात्र से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।