उज्जैन में 1-2 हजार का मुनाफा दिखाकर जीता भरोसा; फिर 10.90 लाख रुपये लेकर गायब हुआ साइबर ठग
Investment Scam In Ujjain: उज्जैन के सॉफ्टवेयर इंजीनियर विकास त्रिवेदी से ₹10.90 लाख की ऑनलाइन ट्रेडिंग ठगी, नीलगंगा पुलिस ने दर्ज किया मामला, टीआई तरुण कुरिल जांच में जुटे।
- Reported By: अजय नीमा | Edited By: सजल रघुवंशी
उज्जैन साइबर फ्रॉड केस (सोर्स- एआई जनरेटेड इमेज)
Ujjain Cyber Fraud Case: ऑनलाइन निवेश से मोटा मुनाफा कमाने का सपना दिखाकर साइबर ठगों ने शहर के एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर को 10 लाख 90 हजार रुपये की चपत लगा दी। ठगों ने पहले छोटे निवेश पर मुनाफा देकर विश्वास जीता और फिर धीरे-धीरे लाखों रुपये निवेश करवा लिए। जब पीड़ित ने अपनी राशि वापस निकालने की कोशिश की तो न केवल संपर्क टूट गया, बल्कि कंपनी का पता भी फर्जी निकला।
नीलगंगा थाना क्षेत्र की विवेकानंद कॉलोनी निवासी सॉफ्टवेयर इंजीनियर विकास त्रिवेदी ने इस संबंध में साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
सोशल मीडिया पर देखा था निवेश कंपनी का विज्ञापन
उज्जैन के नीलगंगा थाना प्रभारी टीआई तरुण कुरिल ने बताया कि विकास त्रिवेदी ने सोशल मीडिया पर एक निवेश कंपनी का विज्ञापन देखा था। कंपनी खुद को शेयर बाजार और स्टॉक एक्सचेंज में निवेश कराकर बेहतर रिटर्न दिलाने वाली संस्था बता रही थी। विज्ञापन में दिए गए मोबाइल नंबर पर संपर्क करने के बाद पीड़ित को कंपनी की वेबसाइट पर भेजा गया, जहां उनसे एक ट्रेडिंग ऐप डाउनलोड करवाया गया और उनका ट्रेडिंग अकाउंट भी खुलवाया गया।
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शुरुआत में पीड़ित ने निवेश की छोटी रकम
टीआई कुरिल के मुताबिक, शुरुआत में पीड़ित ने छोटी रकम निवेश की थी। कंपनी की ओर से 1 से 2 हजार रुपये का मुनाफा भी लौटाया गया, जिससे उनका भरोसा बढ़ गया। इसके बाद कंपनी के कथित कर्मचारियों ने अधिक मुनाफे का लालच देकर बड़ी राशि निवेश करने के लिए प्रेरित किया।
फरवरी से मई तक किए 10 लाख से ज्यादा इन्वेस्ट
उज्जैन पुलिस के अनुसार फरवरी से मई 2026 के बीच पीड़ित ने अलग-अलग किश्तों में कुल 10 लाख 90 हजार रुपये निवेश कर दिए। ऐप में लगातार मुनाफा दिखाई देता रहा, लेकिन जब उन्होंने रकम निकालने की कोशिश की तो बहाने बनाए जाने लगे। कुछ समय बाद जिन मोबाइल नंबरों से संपर्क हो रहा था, वे भी बंद हो गए।
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शक होने पर विकास त्रिवेदी ने कंपनी के पते और अन्य जानकारियों की जांच की। जांच में सामने आया कि कंपनी का पता भी फर्जी है। इसके बाद उन्हें एहसास हुआ कि वे साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं।टीआई तरुण कुरिल ने बताया कि मामले में संबंधित बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। पुलिस आरोपियों तक पहुंचने के लिए तकनीकी साक्ष्य जुटा रही है।
