

Ujjain Central Jail Shradh Tarpan : श्राद्ध पक्ष के दौरान उज्जैन की केंद्रीय जेल भैरवगढ़ में भावुक और अलग तस्वीर सामने आई। यहां अपराधों की सजा काट रहे करीब 150 महिला और पुरुष बंदियों ने अपने दिवंगत परिजनों और पितरों की आत्मशांति के लिए सामूहिक तर्पण और पिंडदान किया।
जेल परिसर के सांस्कृतिक भवन में धार्मिक विधि-विधान से आयोजित कार्यक्रम में बंदियों ने अपने पूर्वजों को जल अर्पित कर उनकी आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना की। आयोजन के दौरान जेल का माहौल श्रद्धा, भावनाओं और आत्ममंथन से भरा नजर आया।
जेल प्रशासन की पहल पर आयोजित सामूहिक श्राद्ध कार्यक्रम में पंडित श्याम गुरु पंचोली ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कराई। करीब 150 महिला और पुरुष बंदी इसमें शामिल हुए। बंदियों ने अपने दिवंगत माता-पिता, परिवार के सदस्यों और पूर्वजों को याद करते हुए तर्पण किया। कई बंदियों के लिए यह अवसर भावुक कर देने वाला रहा, क्योंकि धार्मिक अनुष्ठान के दौरान उन्हें अपने परिवार और बीती जिंदगी की याद आई।
आयोजन का सबसे भावुक पहलू तब सामने आया, जब हत्या के मामले में सजा काट रहे एक कैदी ने उस व्यक्ति का भी तर्पण किया, जिसकी हत्या के मामले में वह जेल में बंद है। कैदी का कहना है कि उससे हत्या गलती से हुई थी। अब वह उसी व्यक्ति की आत्मा की शांति के लिए तर्पण और पूजन कर रहा है। उसने घटना को लेकर पश्चाताप जताते हुए मृतक की आत्मा की शांति की कामना की।
तर्पण में शामिल कुछ अन्य बंदियों ने भी अपने जीवन में हुई गलतियों को याद किया। उन्होंने कहा कि वे गंभीर अपराधों में सजा काट रहे हैं, लेकिन पितरों का स्मरण करते हुए उन्हें अपने परिवार और पुराने जीवन की याद आई। कुछ बंदियों ने अपनी गलतियों पर पछतावा जताते हुए मृत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की। उनके लिए यह आयोजन धार्मिक परंपरा निभाने के साथ अपने अतीत पर विचार करने का अवसर भी बना।
उज्जैन जेल अधीक्षक मनोज कुमार साहू ने बताया कि जेल प्रशासन की ओर से बंदियों को धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में शामिल होने का अवसर दिया जाता है। इसी क्रम में सामूहिक श्राद्ध तर्पण और पिंडदान का आयोजन कराया गया। कार्यक्रम में बंदियों ने पूरे विधि-विधान से अपने पितरों का स्मरण किया। जेल की चारदीवारी के भीतर हुए इस आयोजन में श्रद्धा के साथ मानवीय भावनाएं और आत्ममंथन भी दिखाई दिया।