सोमवती अमावस्या पर भगवान महाकाल दरबार में उमड़ा आस्था जनसैलाब, 2.61 लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

Mahakal Temple saw 2.61 lakh devotees: सोमवती अमावस्या और पुरुषोत्तम मास के अंतिम दिन महाकाल मंदिर में 2.61 लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। तीन दिनों में कुल 7.46 लाख भक्त बाबा महाकाल के दरबार पहुंचे।
सोमवती अमावस्या पर भगवान महाकाल दरबार में उमड़ा आस्था जनसैलाब, 2.61 लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
महाकाल मंदिर (फोटो सोर्स-सोशल मीडिया )
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Mahakal Temple News: उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में सोमवार को सोमवती अमावस्या और पुरुषोत्तम मास के अंतिम दिन श्रद्धालुओं का अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ पड़ा। धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण इस संयोग के कारण देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचे। मंदिर प्रशासन के अनुसार एक ही दिन में 2,61,781 श्रद्धालुओं ने भगवान महाकालेश्वर के दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त किया।

 तीन दिनों में साढ़े सात लाख के करीब पहुंचे श्रद्धालु

मंदिर प्रशासन द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार पिछले तीन दिनों में कुल 7,46,650 श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन किए। 13 जून को 2,36,975, 14 जून को 2,47,894 और 15 जून को 2,61,781 श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। लगातार बढ़ती संख्या ने मंदिर में आस्था का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत किया।

 गर्मी और उमस भी नहीं रोक सकी आस्था

भीषण गर्मी और उमस के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखाई दी। सुबह से देर रात तक मंदिर परिसर, दर्शन मार्ग और आसपास के क्षेत्रों में भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं। दूर-दराज राज्यों से आए श्रद्धालुओं ने घंटों इंतजार कर बाबा महाकाल के दर्शन किए।

प्रशासन ने संभाली व्यवस्थाएं

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए महाकाल मंदिर प्रबंध समिति और प्रशासन ने विशेष व्यवस्थाएं की थीं। दर्शन व्यवस्था, सुरक्षा, बैरिकेडिंग, कतार प्रबंधन, पेयजल, चिकित्सा सहायता और अन्य सुविधाओं पर लगातार निगरानी रखी गई। अधिकारियों और कर्मचारियों ने समन्वय के साथ व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखा।

आस्था का फिर दिखा विराट स्वरूप

सोमवती अमावस्या और पुरुषोत्तम मास के समापन पर महाकाल नगरी में उमड़ी श्रद्धालुओं की यह भीड़ बाबा महाकाल के प्रति अटूट विश्वास का प्रमाण बनी। लाखों भक्तों ने व्यवस्थित रूप से दर्शन कर आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया। यह अवसर एक बार फिर साबित कर गया कि महाकाल के प्रति श्रद्धा हर परिस्थिति से ऊपर है।

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