Mahadev Baba Dandwat Yatra : आस्था, भक्ति और निष्काम समर्पण की अनूठी मिसाल पेश करते हुए बिहार के बेगूसराय निवासी शिवभक्त ‘महादेव बाबा’ ओंकारेश्वर से दंडवत प्रणाम करते हुए उज्जैन पहुंच गए हैं। बाबा महाकाल के दर्शन के संकल्प के साथ शुरू हुई उनकी यह कठिन यात्रा अब 32वें दिन में प्रवेश कर चुकी है। भीषण गर्मी, बारिश और कठिन रास्तों के बावजूद वे लगातार दंडवत प्रणाम करते हुए अपनी यात्रा पूरी कर रहे हैं।
महादेव बाबा की यात्रा कितनी कठिन है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे करीब एक किलोमीटर की दूरी तय करने में 500 से 525 बार तक दंडवत प्रणाम करते हैं। हर दंडवत के दौरान वे सात बार ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करते हैं। जमीन पर लेटकर प्रणाम करने और फिर उठकर आगे बढ़ने की यह प्रक्रिया वे लगातार दोहरा रहे हैं।
महादेव बाबा को इस तरह दंडवत यात्रा करते देख रास्ते में लोगों की भीड़ जुट रही है। स्थानीय लोग और राहगीर उनकी भक्ति को नमन कर रहे हैं। कई लोग उन्हें पानी और यात्रा के दौरान जरूरी सामान भी उपलब्ध करा रहे हैं। कठिन परिस्थितियों के बावजूद बाबा के लगातार आगे बढ़ने का सिलसिला जारी है।
महादेव बाबा लंबे समय से भगवान शिव की आराधना कर रहे हैं। वर्ष 2004 से वे लगातार बाबा बैद्यनाथ को जल अर्पित करते आ रहे हैं। उन्होंने पांच वर्षों तक सावन के प्रत्येक सोमवार को डाक बम के रूप में जल चढ़ाने की यात्रा की। इसके अलावा वे हरिद्वार से दो बार पैदल कांवड़ यात्रा भी पूरी कर चुके हैं।
महादेव बाबा की शिवभक्ति से जुड़ी एक और कठिन यात्रा गंगोत्री से रामेश्वरम तक की है। उन्होंने गंगोत्री से जल लेकर करीब 8 से 9 महीने में पैदल यात्रा पूरी की थी। इन यात्राओं के जरिए वे लगातार भगवान शिव के प्रति अपनी आस्था और समर्पण को व्यक्त करते रहे हैं।
महादेव बाबा के मुताबिक, उन्होंने वर्ष 2022 में पहली बार दंडवत यात्रा की थी। अब 2026 में वे दूसरी बार इसी कठिन साधना पर निकले हैं। उनका कहना है कि यह यात्रा किसी सांसारिक इच्छा या व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं है। वे भगवान शिव से कुछ मांगने के बजाय अपनी भक्ति और समर्पण व्यक्त करने के लिए यह यात्रा कर रहे हैं।
महादेव बाबा का कहना है कि भगवान शिव के प्रति उनका विश्वास ही उन्हें इतनी कठिन यात्रा पूरी करने की शक्ति देता है। वे कहते हैं कि उन्हें महादेव से कोई सांसारिक मांग नहीं है। उनकी इच्छा केवल इतनी है कि भगवान शिव के प्रति उनकी भक्ति और आस्था हमेशा बनी रहे। ओंकारेश्वर से उज्जैन तक दंडवत यात्रा उनके लिए बाबा महाकाल के दरबार तक पहुंचने की साधना है।