उज्जैन से हुआ ‘कौन बनेगा ज्ञानरत्न’ का भव्य शुभारंभ; वाल्मीकि रामायण आधारित राष्ट्रीय ज्ञान अभियान का आगाज

Ujjain News: उज्जैन में राष्ट्रीय महाकाल सेना के स्थापना दिवस पर रामायण क्विज 'कौन बनेगा ज्ञानरत्न' की शुरुआत हुई। इस कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों के युवाओं भाग लिया।
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कौन बनेगा ज्ञानरत्न (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Kaun Banega Gyanratna: बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में राष्ट्रीय महाकाल सेना के स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित भव्य धार्मिक कार्यक्रम के दौरान रामायण आधारित ज्ञान प्रतियोगिता ‘कौन बनेगा ज्ञानरत्न’ की शुरुआत की गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, सामाजिक कार्यकर्ता और धर्मप्रेमी शामिल हुए। आयोजन के दौरान भजन संध्या के साथ प्रतियोगिता से जुड़े टीज़र का भी विमोचन किया गया।

आयोजकों ने बताया कि ‘कौन बनेगा ज्ञानरत्न’ का उद्देश्य बच्चों और युवाओं को भारतीय संस्कृति, सनातन परंपराओं और भगवान श्रीराम के आदर्शों से जोड़ना है। उनका कहना है कि बदलते दौर में युवाओं को अपनी सांस्कृतिक विरासत और मूल्यों से जोड़ने के लिए ऐसे प्रयास जरूरी हैं।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कही बड़ी बात

कार्यक्रम में मौजूद वक्ताओं ने कहा कि रामायण केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं बल्कि जीवन को दिशा देने वाला मार्गदर्शक है। भगवान श्रीराम के जीवन से त्याग, मर्यादा, भाईचारे, कर्तव्य और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे मूल्यों की सीख मिलती है। ऐसे में युवाओं तक इन आदर्शों को पहुंचाने के लिए ज्ञान आधारित मंच महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

विभिन्न राज्यों के युवाओं ने लिया हिस्सा

आयोजकों के अनुसार प्रतियोगिता में देश के विभिन्न राज्यों से बच्चों और युवाओं ने भागीदारी की है। चयनित प्रतिभागियों को मंच पर रामायण आधारित प्रश्नों के माध्यम से अपनी ज्ञान क्षमता प्रदर्शित करने का अवसर दिया गया। प्रतियोगिता के माध्यम से युवाओं में धार्मिक और सांस्कृतिक विषयों के प्रति रुचि बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

कार्यक्रम का पहला सीजन तैयार

कार्यक्रम से जुड़े पवन घल्याण ने बताया कि प्रतियोगिता का पहला सीजन तैयार किया गया है और इसमें विभिन्न राज्यों के प्रतिभागियों को शामिल किया गया है। इस तरह की पहल युवाओं को सकारात्मक सोच, सामाजिक मूल्यों और भारतीय संस्कृति से जोड़ने का माध्यम बन सकती है। आयोजन में शामिल एडवोकेट आनंद यादव (गोविंदा) ने कहा कि उज्जैन देश की आध्यात्मिक चेतना का प्रमुख केंद्र है। ऐसे में महाकाल नगरी उज्जैन से शुरू हुई यह पहल युवाओं तक रामायण और भारतीय संस्कृति के संदेश को पहुंचाने का माध्यम बन सकती है।

धार्मिक और सांस्कृतिक वातावरण के बीच आयोजित इस कार्यक्रम में वक्ताओं ने युवाओं से अपनी परंपराओं, संस्कारों और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े रहने का आह्वान किया। आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।

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