शिप्रा नदी में गिरी उज्जैन पुलिस की गाड़ी, थाना प्रभारी की मौत, 2 अन्य पुलिसकर्मी लापता

भारी बारिश के कारण उज्जैन में शिप्रा नदी ने रौद्र रूप धारण कर लिया है। बीती रात उज्जैन पुलिस गाड़ी नदी में गिर गई जिसमें थाना प्रभारी समेत तीन पुलिसकर्मी थे। थाना प्रभारी का शव बरामद हो गया है।
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शिप्रा नदी में सर्च ऑपरेशन जारी, फोटो- सोशल मीडिया
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Ujjain Police Accident: मध्य प्रदेश के उज्जैन में भारी बारिश के कारण शिप्रा नदी उफान पर है और इसका कहर एक दर्दनाक हादसे के रूप में सामने आया। शनिवार रात करीब 9:30 बजे एक पुलिस वाहन शिप्रा नदी के बड़े पुल से गुजरते समय तेज बहाव में बह गया।

पुलिस की गाड़ी में थाना प्रभारी अशोक शर्मा, एसआई मदनलाल निनामा और महिला पुलिसकर्मी आरती पाल सवार थीं। इस हादसे में थाना प्रभारी का शव बरामद कर लिया गया है, जबकि बाकी दो पुलिसकर्मियों की तलाश अभी भी जारी है।

15 घंटे बीते पर नहीं मिला सुराग

सूचना मिलते ही प्रशासन सतर्क हो गया और NDRF व SDRF की टीमें रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए मौके पर पहुंचीं। लेकिन नदी का बढ़ता जलस्तर और तेज बहाव राहत कार्यों को लगातार चुनौती दे रहा है। अब तक 15 घंटे से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन लापता पुलिसकर्मियों का कोई सुराग नहीं मिल पाया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, तीनों पुलिसकर्मी एक लापता महिला की तलाश में निकले थे और चिंतामण क्षेत्र की ओर जा रहे थे। जब उनका मोबाइल फोन बंद आने लगा और आखिरी लोकेशन नदी पुल के पास मिली, तो आशंका गहराई। इसके बाद जब मंगलनाथ क्षेत्र में थाना प्रभारी अशोक शर्मा का शव मिला, तो पुष्टि हो गई कि पुलिस की गाड़ी ही नदी में गिर गई थी।

लापता महिला की तलाश कर रहे थे पुलिसकर्मी

कार में सवार तीनों पुलिसकर्मी ड्यूटी पर थे और लापता महिला की तलाश का जिम्मा उनके पास था। घटना के बाद पूरे पुलिस महकमे में शोक की लहर है और लगातार राहत-बचाव कार्य चलाया जा रहा है। उज्जैन के एसपी प्रदीप शर्मा ने जानकारी दी कि तेज बारिश और जलस्तर में अचानक वृद्धि के कारण हादसा हुआ।

घटना के बाद से नदी के आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और लोगों को नदी किनारे न जाने की सख्त हिदायत दी गई है। प्रशासन ने चेतावनी जारी की है कि बारिश थमने तक अनावश्यक यात्रा और नदी किनारे की गतिविधियों से बचें।

उज्जैन जैसे धार्मिक और भीड़भाड़ वाले शहर में प्रशासन के लिए यह एक गंभीर चेतावनी भी है कि बुनियादी ढांचे और चेतावनी प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।

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