Shahdol News: निलंबित प्रधान आरक्षक विवेकानंद तिवारी ने शेयर किए दस्तावेज, कहा- बिना सूचना दिए छुट्टी नहीं ली
Traffic Constable Suspension: शहडोल में निलंबित यातायात प्रधान आरक्षक विवेकानंद तिवारी ने अपना पक्ष रखते हुए मेडिकल दस्तावेज साझा किए हैं। उन्होंने कहा कि वह बिना सूचना के गैरहाजिर नहीं थे।
- Reported By: दीपक ताम्रकार | Edited By: प्रीतेश जैन
विवेकानंद तिवारी और उनकी पोस्ट (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
Vivekanand Tiwari Suspension Case: सोशल मीडिया पर सड़क सुरक्षा और यातायात जागरूकता से जुड़े वीडियो के लिए चर्चित शहडोल यातायात विभाग के प्रधान आरक्षक विवेकानंद तिवारी के निलंबन मामले ने नया मोड़ ले लिया है। बिना सूचना के ड्यूटी से गैरहाजिर रहने के आरोप में निलंबित किए गए विवेकानंद तिवारी ने अब सोशल मीडिया पर अपना पक्ष सार्वजनिक करते हुए मेडिकल दस्तावेज और विभागीय व्हाट्सएप ग्रुप में दी गई सूचना के स्क्रीनशॉट साझा किए हैं।
तिवारी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया है कि वह बिना सूचना के अनुपस्थित नहीं थे। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ महीनों से वह मानसिक तनाव, अनिद्रा, घबराहट और बेचैनी जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। 19 मई 2026 को स्वास्थ्य खराब होने पर उन्होंने मोबाइल फोन के माध्यम से यातायात थाना को सूचना दी थी कि वह मेडिकल कॉलेज में इलाज कराने जा रहे हैं।
ग्रुप में शेयर की थी मेडिकल पर्ची
उनका कहना है कि मनोचिकित्सक से परामर्श लेने के बाद उन्हें एक सप्ताह आराम करने और दवाइयां लेने की सलाह दी गई थी। उन्होंने दावा किया कि मेडिकल पर्ची उसी दिन विभाग के व्हाट्सएप ग्रुप में शेयर कर दी गई थी, जिसमें पुलिस अधीक्षक भी शामिल हैं। इसके बावजूद उनकी ड्यूटी जय स्तंभ चौक पर लगाई गई और बाद में उन्हें गैरहाजिर दर्ज कर लिया गया।
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‘मैं बिना सूचना के गैरहाजिर नहीं हूं’
सोशल मीडिया पोस्ट में विवेकानंद तिवारी ने लिखा कि उन्होंने 13 सालों की सर्विस पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ निभाई है। तिवारी ने कहा कि उन्होंने केवल सात दिन की मेडिकल छुट्टी मांगी थी, लेकिन छुट्टी पूरी होने से पहले ही उनके खिलाफ दो प्रारंभिक जांच शुरू कर दी गईं। तिवारी ने इसे अमानवीय बताते हुए कहा कि वह विभाग की गरिमा का सम्मान करते हैं, लेकिन मजबूरी में उन्हें अपने दस्तावेज सार्वजनिक करने पड़े।
एसपी ने किया था निलंबित
गौरतलब है कि शहडोल पुलिस अधीक्षक रामजी श्रीवास्तव ने प्रधान आरक्षक विवेकानंद तिवारी को निलंबित कर दिया था। आदेश में उल्लेख किया गया था कि तिवारी 19 मई 2026 से लगातार ड्यूटी से अनुपस्थित हैं। साथ ही आरोप लगाया गया कि वह विभिन्न स्थानों पर वीडियो बनाकर इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर निजी लाभ एवं प्रचार के उद्देश्य से अपलोड कर रहे थे, जो पुलिस रेग्यूलेशन 64 और सेवा की सामान्य शर्तों का उल्लंघन है।
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सोशल मीडिया पर मिल रहा समर्थन
विवेकानंद तिवारी द्वारा अपना पक्ष सार्वजनिक करने के बाद उनके समर्थक और फॉलोअर्स सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कई लोगों ने उनके द्वारा साझा किए गए दस्तावेजों के आधार पर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं विभागीय कार्रवाई और तिवारी के दावों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। फिलहाल मामला जांच के दायरे में है और विभागीय स्तर पर आगे की कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है।
