शहडोल के सरकारी स्कूल में सांस्कृतिक मंच पर लग रही पाठशाला; गैस सिलेंडर के साए में मासूम बच्चे कर रहे पढ़ाई
Government School Poor Infrastructure Condition: शहडोल के अतरिया स्कूल में मौत के साए में पढ़ाई, सांस्कृतिक मंच पर कक्षा, बगल में जलता गैस सिलेंडर व खुला कुआं, कड़े विलेख संग विजीलैंस जांच तेज।
- Reported By: दीपक ताम्रकार | Edited By: सजल रघुवंशी
शहडोल में सरकारी स्कूल की हालत खराब (सोर्स- सोशल मीडिया)
Shahdol Government School Infrastructure Condition: मध्य प्रदेश के आदिवासी बाहुल्य शहडोल जिले से शिक्षा व्यवस्था की एक बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। एक ओर सरकार आधुनिक और सुरक्षित शिक्षा व्यवस्था के दावे कर रही है, तो दूसरी ओर बुढार विकासखंड के अतरिया शासकीय माध्यमिक विद्यालय के बच्चे आज भी स्कूल भवन के अभाव में सामुदायिक भवन और सांस्कृतिक मंच पर पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जिस कमरे में बच्चे बैठकर पढ़ते हैं, उसी कमरे में गैस सिलेंडर रखकर मध्यान्ह भोजन भी बनाया जाता है। वहीं पास में मौजूद खुला कुआं और जर्जर स्कूल भवन बच्चों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर रहे हैं।
कक्षा आठवीं तक के बच्चों के लिए नहीं है सुरक्षित स्कूल भवन
बुढार विकासखंड के शासकीय माध्यमिक विद्यालय अतरिया में कक्षा पहली से आठवीं तक के विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित स्कूल भवन उपलब्ध नहीं है। पुराना भवन पूरी तरह जर्जर होने के कारण स्कूल का संचालन सामुदायिक भवन और गांव के सांस्कृतिक मंच पर किया जा रहा है। बारिश के मौसम में खुले स्थान पर पढ़ाई, जलभराव और फिसलन के कारण बच्चों और शिक्षकों को रोजाना मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
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जिस कमरे में पढ़ रहे बच्चे, उसी कमरे में बन रहा भोजन
स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब सामुदायिक भवन के उसी कमरे में, जहां बच्चे पढ़ाई करते हैं, गैस सिलेंडर रखकर मध्यान्ह भोजन तैयार किया जाता है। दर्जनों मासूम बच्चों के बीच सिलेंडर और रसोई की व्यवस्था किसी भी समय बड़े हादसे की वजह बन सकती है। इसके अलावा सांस्कृतिक मंच के पास स्थित गहरा खुला कुआं भी बच्चों के लिए लगातार खतरा बना हुआ है।
83 स्कूल भवन पूरी तरह से जर्जर हो चुके हैं- अमरनाथ
इस पूरे मामले पर जिला परियोजना समन्वयक अमरनाथ का कहना है कि जिले में 83 स्कूल भवन पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं और संचालन योग्य नहीं हैं, जबकि 646 विद्यालय भवनों में मरम्मत की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि 20 नए स्कूल भवनों के निर्माण का प्रस्ताव जिला खनिज प्रतिष्ठान (डीएमएफ) मद से शासन को भेजा गया है।
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सवाल यह है कि आखिर आदिवासी अंचल के इन मासूम बच्चों को सुरक्षित और सुविधायुक्त स्कूल भवन कब मिलेगा? जब शिक्षा की बुनियाद ही सांस्कृतिक मंच, गैस सिलेंडर और खुले कुएं के साए में रखी जा रही हो, तब जिम्मेदार विभागों के दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इन बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा के लिए कब तक ठोस कदम उठाता है।
