

Rani Durgavati Tiger Reserve Bagh Rakhi Campaign : रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के प्रेम और सुरक्षा के संकल्प का प्रतीक माना जाता है, लेकिन इस बार सागर जिले के रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में इस पर्व को एक खास सामाजिक और पर्यावरणीय संदेश से जोड़ा गया है। वन विभाग ने ‘राखी का एक धागा, संरक्षण का पक्का वादा’ थीम के साथ अनूठा अभियान शुरू किया है। इसके तहत टाइगर रिजर्व से लगे गांवों में महिलाएं और युवतियां वनकर्मियों यानी ‘ग्रीन वारियर’ की कलाई पर बाघ की आकृति वाली विशेष राखियां बांध रही हैं।
रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व प्रशासन ने इस अभियान के लिए करीब 10 हजार विशेष बाघ राखियां तैयार करवाई हैं। इन राखियों पर बाघ और अन्य वन्य प्राणियों की आकृतियां बनाई गई हैं। वन विभाग की टीमें इन्हें लेकर टाइगर रिजर्व से सटे गांवों में पहुंच रही हैं और स्थानीय लोगों को जंगल एवं वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूक कर रही हैं।
राखी बांधने के दौरान महिलाएं और युवतियां केवल अपने ‘ग्रीन वारियर’ भाइयों की सुरक्षा की कामना ही नहीं कर रहीं, बल्कि जंगल, बाघ और अन्य वन्यजीवों के संरक्षण का संकल्प भी ले रही हैं। अभियान के जरिए लोगों से अपील की जा रही है कि वे वन्यजीवों के प्रति संवेदनशील बनें और उनके संरक्षण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।
टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर रजनीश सिंह के अनुसार, वन और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए सिर्फ सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी बेहद जरूरी है। ग्रामीण यदि जंगल और वन्य प्राणियों को अपने जीवन और समाज का हिस्सा मानकर उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी लेंगे, तो संरक्षण के प्रयास और अधिक प्रभावी होंगे।
वन विभाग की टीम आसपास के गांवों में पहुंचकर ग्रामीणों से संवाद कर रही है। लोगों को बाघों और अन्य वन्यजीवों के महत्व के बारे में जानकारी दी जा रही है। साथ ही किसी भी तरह की अवैध गतिविधि, शिकार या वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाने वाली घटनाओं की सूचना तत्काल विभाग तक पहुंचाने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है।
‘राखी का एक धागा, संरक्षण का पक्का वादा’ अभियान रक्षाबंधन की पारंपरिक भावना को प्रकृति संरक्षण से जोड़ने की कोशिश है। जिस तरह भाई अपनी बहन की रक्षा का संकल्प लेता है, उसी तरह यह पहल समाज को जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा के प्रति जिम्मेदार बनाने का संदेश दे रही है। रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व की यह अनूठी पहल अब गांव-गांव पहुंचकर जनभागीदारी के जरिए संरक्षण की मजबूत डोर तैयार कर रही है।