

Rajgarh Land Dispute : राजगढ़ जिले में करीब 50 करोड़ रुपये की जमीन को लेकर विवाद सामने आया है। स्थानीय किसान देवकरण गुर्जर ने मूंदड़ा परिवार पर उसकी जमीन पर कब्जा करने का आरोप लगाया है। किसान का दावा है कि वर्ष 2003 में जमीन की रजिस्ट्री उसके नाम हुई थी और राजस्व रिकॉर्ड में भी उसका नाम दर्ज है, लेकिन रजिस्ट्री के बाद से ही मूंदड़ा परिवार ने जमीन पर कब्जा कर लिया। किसान के मुताबिक, जमीन पर होटल, कोठी और दुकानें तक बना दी गई हैं।
किसान देवकरण गुर्जर का कहना है कि जमीन की रजिस्ट्री आज भी उसके नाम है। वह इस संपत्ति का प्रॉपर्टी टैक्स भी नियमित रूप से जमा कर रहा है। इसके बावजूद जमीन का वास्तविक कब्जा उसके पास नहीं है। किसान ने प्रशासन से पूरे मामले की जांच कर जमीन पर अपना अधिकार वापस दिलाने की मांग की है।
मामले में नवभारत ने संबंधित पटवारी से बात की। पटवारी ने उपलब्ध राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर जमीन देवकरण गुर्जर के नाम दर्ज होने की बात कही। पटवारी के मुताबिक, जमीन का प्रॉपर्टी टैक्स भी किसान द्वारा जमा कराया जाता है और उपलब्ध दस्तावेजों में भी उसका नाम दर्ज है। हालांकि, राजस्व रिकॉर्ड में जमीन का नक्शा उपलब्ध नहीं होने की बात भी सामने आई है। इससे दस्तावेजों और मौके की स्थिति के बीच अंतर को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
किसान का आरोप है कि उसकी जमीन पर कब्जा करने के बाद वहां होटल, कोठी और दुकानें बना दी गईं। उसका कहना है कि कागजों में जमीन का मालिक होने और लगातार टैक्स जमा करने के बावजूद वह संपत्ति का इस्तेमाल नहीं कर पा रहा है। अब प्रशासन के सामने जमीन रजिस्ट्री, राजस्व रिकॉर्ड और मौके पर मौजूद निर्माण का मिलान कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की चुनौती है।
मूंदड़ा परिवार का नाम इससे पहले भी एक अलग मामले को लेकर चर्चा में आया था। श्योपुर में हाईवे किनारे बच्ची मिलने के मामले की जांच के दौरान पुलिस ने बच्ची को छह दिन की उम्र में करीब एक लाख रुपये में खरीदे जाने का दावा किया था। इस मामले में राजगढ़ के आकाश मूंदड़ा और उनकी पत्नी कृतिका मूंदड़ा समेत छह लोगों की गिरफ्तारी की रिपोर्ट सामने आई थी। हालांकि, मौजूदा जमीन विवाद का यह मामला अलग है।
जमीन विवाद को लेकर आनंद मूंदड़ा ने किसान के आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि यदि जमीन पर अवैध कब्जा है तो सरकार और प्रशासन कार्रवाई कर सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि वे वर्षों से जमीन पर हैं और उनके पास भी संपत्ति से संबंधित दस्तावेज मौजूद हैं। हालांकि, जब इन दस्तावेजों के बारे में जानकारी मांगी गई तो उन्होंने फोन काट दिया। इसके बाद कई बार संपर्क करने के बावजूद फोन रिसीव नहीं किया।
करीब 50 करोड़ रुपये की जमीन से जुड़े इस विवाद में अब प्रशासन की जांच अहम होगी। रजिस्ट्री, राजस्व रिकॉर्ड, प्रॉपर्टी टैक्स, जमीन के नक्शे और मौके पर बने निर्माण की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि उपलब्ध रिकॉर्ड और टैक्स दस्तावेज किसान के नाम हैं, तो जमीन पर मूंदड़ा परिवार का कब्जा किस आधार पर है। प्रशासनिक जांच के बाद ही इस विवाद की पूरी तस्वीर साफ हो पाएगी।