नर्मदापुरम: हाइब्रिड मॉडल में भी किसानों की मुश्किलें बरकरार, खाद के लिए तीन-तीन लाइन में लगने को मजबूर किसान

Narmadapuram Farmers News: नर्मदापुरम में हाइब्रिड मॉडल लागू होने के बाद भी किसानों की खाद वितरण संबंधी परेशानी कम नहीं हुई। POS सिस्टम में 3 लाइनें और ई-टोकन व्यवस्था को लेकर किसानों ने नाराजगी जताई।
Narmadapuram Fertilizer Hybrid Model Problem
नर्मदापुरम में खाद के लिए परेशान होते किसान (फोटो सोर्स- नवभारत)
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Narmadapuram Fertilizer Distribution : किसान आंदोलन के बाद सरकार ने ई-टोकन व्यवस्था के साथ हाइब्रिड मॉडल लागू कर किसानों को खाद वितरण की नई व्यवस्था शुरू की है, लेकिन नर्मदापुरम जिले में यह व्यवस्था भी किसानों की परेशानी कम नहीं कर पा रही है। पीओएस (POS) सिस्टम से खाद लेने पहुंचे किसानों को एक नहीं, बल्कि तीन अलग-अलग लाइनों में लगना पड़ रहा है। इसके अलावा डीएपी और यूरिया लेने के लिए अलग-अलग काउंटरों पर जाना पड़ रहा है, जिससे किसानों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।

किसानों का कहना है कि सबसे पहले उन्हें दस्तावेज जमा करने के लिए लाइन में लगना पड़ता है। इसके बाद दूसरी लाइन में ओटीपी प्राप्त करने की प्रक्रिया पूरी होती है। तीसरी लाइन में भुगतान कर बिल कटवाया जाता है। बिल मिलने के बाद भी परेशानी खत्म नहीं होती, क्योंकि डीएपी और यूरिया अलग-अलग स्थानों से लेना पड़ता है। इससे किसानों का पूरा दिन खाद लेने में ही निकल जाता है।

ई-टोकन व्यवस्था पर भी किसानों की नाराजगी

किसान नेताओं का कहना है कि आंदोलन के दौरान उनकी प्रमुख मांग ई-टोकन व्यवस्था समाप्त करने की थी। सरकार ने सुविधा के लिए हाइब्रिड मॉडल लागू किया, जिसमें ई-टोकन और पीओएस दोनों माध्यमों से खाद वितरण किया जा रहा है। हालांकि किसानों का आरोप है कि ई-टोकन प्रणाली में रकबे के अनुपात में खाद का आवंटन नहीं हो रहा है। उनका कहना है कि जितनी जमीन है, उसके हिसाब से खाद उपलब्ध कराया जाए और पीओएस व्यवस्था को भी सरल बनाया जाए।

मार्कफेड ने बताया पर्याप्त है खाद का स्टॉक

जिला प्रबंधक मार्कफेड अनिल जैन ने बताया कि जिले में फिलहाल 30,595 मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध है। डीएपी की दो रैक प्रस्तावित हैं, जिनमें से 2,800 मीट्रिक टन डीएपी का डिस्पैच जारी है। इसके अलावा 5,000 मीट्रिक टन एमपीके खाद भी उपलब्ध है। उनके अनुसार जिले में खाद की कोई कमी नहीं है और किसानों को पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराया जा रहा है।

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स्टॉक पर्याप्त, लेकिन व्यवस्था पर उठ रहे सवाल

एक ओर प्रशासन खाद का पर्याप्त स्टॉक होने का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर वितरण केंद्रों पर लंबी कतारें और जटिल प्रक्रिया किसानों की परेशानी बढ़ा रही है। किसानों का कहना है कि यदि वितरण व्यवस्था को सरल नहीं बनाया गया तो खाद उपलब्ध होने के बावजूद उन्हें अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ता रहेगा।

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