

Government Employees New Rule Bhopal: मध्यप्रदेश की मोहन सरकार अपने 5.50 लाख सरकारी कर्मचारियों के लिए एक तरफ जहां बड़ी राहत देने जा रही है, वहीं दूसरी तरफ दफ्तरों में अनुशासन और समय की पाबंदी को लेकर बेहद सख्त कदम उठाने की तैयारी में है। राज्य सरकार जल्द ही सिविल सेवा आचरण नियमों में बड़े बदलाव करने जा रही है।
प्रदेश के साढ़े पांच लाख सरकारी कर्मचारियों की बायोमैट्रिक उपस्थिति दर्ज करने के लिए सॉफ्टवेयर बनाने की प्रक्रिया तेज हो गई है। सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) की सैद्धांतिक मंजूरी के बाद यह काम एमपीएसईडीसी (MPSEDC) को सौंप दिया गया है। सरकारी दफ्तरों में बायोमैट्रिक मशीनों की खरीदी और वेंडर चयन के लिए टेंडर भी जारी कर दिए गए हैं।
इस नए सिस्टम की खासियत यह होगी कि कर्मचारी के मशीन पर पंच करते ही उसका लॉग-इन सीधे केंद्रीय सर्वर पर दर्ज हो जाएगा। इसमें ऑटोमेशन फीचर जोड़ा जा रहा है, जिससे कर्मचारियों की रियल टाइम मॉनिटरिंग हो सकेगी। शुरुआत में यह व्यवस्था मंत्रालय, सतपुड़ा, विंध्याचल और राजधानी के विभागाध्यक्ष कार्यालयों में लागू होगी, जिसके बाद इसे कमिश्नर, कलेक्ट्रेट और अन्य जिला कार्यालयों में भी शुरू किया जाएगा।
नए सॉफ्टवेयर के आने के बाद सरकारी कर्मचारियों का लॉग-इन सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे के लिए सीधे केंद्रीय सर्वर पर दर्ज होगा। अगर कोई कर्मचारी दफ्तर आने के बाद अपनी सीट या डेस्क से गायब रहता है, तो यह आधुनिक सॉफ्टवेयर अपने आप उसकी 'शॉर्ट लीव' (शार्ट ब्रेक) या 'हाफ डे' दर्ज कर देगा। यह सिस्टम खुद ही ट्रैक कर लेगा कि कौन सा कर्मचारी डेस्क पर मौजूद है और कौन फील्ड ड्यूटी पर गया हुआ है।
मोहन सरकार कर्मचारियों से जुड़े दो बड़े और पुराने नियमों में भी संशोधन करने जा रही है। वर्षों पहले लागू किए गए 'दो ही बच्चे अच्छे' के नियम की बंदिश को हटाने पर सरकार में सहमति बन गई है। इसके संशोधित आदेश जल्द ही जारी हो सकते हैं। इस फैसले के बाद उन सैकड़ों सरकारी कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलेगी, जिन पर जाने-अनजाने में Two Child Policy के कारण विभागीय कार्रवाई की तलवार लटकी हुई थी।
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इसके साथ ही सरकार 'गिफ्ट नीति' में भी कुछ रियायतें देने जा रही है। नए नियमों के तहत अधिकारी और कर्मचारी कुछ शर्तों के साथ एक वर्ष के भीतर अपनी एक महीने की सैलरी के बराबर का मूल्यवान गिफ्ट ले सकेंगे। हालांकि, इसे कमाई का जरिया बनाने या बहुत कीमती उपहार लेने पर कड़े दंडात्मक प्रावधान बरकरार रहेंगे। इसके अलावा, सरकारी कर्मचारियों को अपना निवेश भी सोच-समझकर करना होगा। नियम यह भी तय कर रहे हैं कि निवेश की जाने वाली रकम कर्मचारी की वैध कमाई से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।