मंडला में 2.5 करोड़ का सरकारी अनाज स्वाहा! निजी कंपनी कंपनी पर एफआईआर दर्ज, कार्रवाई अब भी अधूरी

Government Grain Destroyed Mandla: मंडला के हीरापुर ओपन कैप में 2.5 करोड़ की सरकारी धान सड़ने के मामले में विधिक चोक-होल्ड, वर्षों बाद भी अंतिम कार्रवाई का इंतजार, सुशासन ग्रिड अलर्ट।
Mandla food grain storage controversy raises questions over accountability despite police action
मंडला में सरकारी अनाज स्वाहा (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Mandla Government Grain Destroyed By Rain: मध्य प्रदेश के मंडला जिले के नैनपुर विकासखंड से सरकारी भंडारण व्यवस्था की बड़ी लापरवाही सामने आई है। ग्राम हीरापुर स्थित खुले भंडारण केंद्र (ओपन कैप) में रखी करीब ढाई करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी धान रखरखाव के अभाव में खराब हो गई।

किसानों की मेहनत से उपजा अनाज सड़कर बेकार हो गया, जबकि यह धान सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के जरिए जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाई जानी थी। मामले में निजी कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई, लेकिन वर्षों बाद भी अंतिम कार्रवाई नहीं हो सकी है।

2021-22 में हुई लापरवाही, किसानों की मेहनत पर फिरा पानी

यह पूरा मामला वर्ष 2021-22 का है। नैनपुर विकासखंड के ग्राम हीरापुर स्थित ओपन कैप में सरकारी धान के सुरक्षित भंडारण की जिम्मेदारी एक निजी कंपनी को दी गई थी। आरोप है कि कंपनी ने भंडारण और रखरखाव के निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया। पर्याप्त सुरक्षा और संरक्षण के अभाव में करीब 700 से 750 क्विंटल धान पूरी तरह खराब हो गई। यह वही धान थी, जिसे किसानों से समर्थन मूल्य पर खरीदा गया था।

एफआईआर दर्ज, लेकिन वर्षों बाद भी कार्रवाई अधूरी

मामले की गंभीरता सामने आने के बाद संबंधित निगम ने निजी कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। हालांकि घटना को कई वर्ष बीत जाने के बावजूद दोषियों के खिलाफ अंतिम कार्रवाई नहीं हो सकी है। फिलहाल यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है। लंबे समय से लंबित इस प्रकरण ने सरकारी निगरानी व्यवस्था और जवाबदेही पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रबंधक ने कंपनी की लापरवाही को बताया नुकसान की वजह

निगम के प्रबंधक श्रीकांत जैन के अनुसार, धान के सुरक्षित रखरखाव की पूरी जिम्मेदारी संबंधित निजी कंपनी की थी। कंपनी की लापरवाही के कारण ही सरकारी अनाज खराब हुआ और करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ। उन्होंने बताया कि निगम स्तर पर मामले के निराकरण की प्रक्रिया जारी है, जबकि कानूनी कार्रवाई भी न्यायालय में चल रही है।

सरकारी व्यवस्था पर उठे सवाल, जिम्मेदारी तय होने का इंतजार

इस मामले ने सरकारी भंडारण व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों की मेहनत से खरीदी गई उपज, गरीबों के राशन के लिए सुरक्षित रखा गया अनाज और सरकारी खजाने के करोड़ों रुपये का नुकसान आखिर किसकी जिम्मेदारी है, यह अब भी स्पष्ट नहीं हो पाया है। अब सभी की नजर न्यायालय की कार्रवाई और इस बात पर है कि दोषियों पर प्रभावी कार्रवाई कब होगी तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाएंगे।

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