5 MAF पानी का उपयोग नहीं कर पाया मध्य प्रदेश, क्या राघवपुर और बसानिया बांध बचा पाएंगे राज्य का हक?
Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश पर नर्मदा जल का हिस्सा खोने का खतरा। राघवपुर और बसानिया परियोजनाओं में देरी से गुजरात को मिल सकता है अतिरिक्त पानी, जानें पूरा मामला।
- Written By: सजल रघुवंशी
Basania Dam Project (Source- Social Media)
Narmada Water Dispute Tribunal: मध्य प्रदेश सरकार द्वारा परियोजनाओं को मंजूरी देने और राघवपुर एवं बसानिया बांधों से प्रभावित लोगों के लिए विशेष मुआवजा पैकेज की घोषणा के बावजूद, भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में लालफीताशाही के कारण देरी हो रही है। इससे मध्य प्रदेश को अपने नर्मदा जल के हिस्से के खोने का खतरा पैदा हो गया है यदि इन परियोजनाओं को तुरंत तेजी से आगे नहीं बढ़ाया गया।
1979 के नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण (NWDT) के निर्णय के अनुसार, मध्य प्रदेश को 18.25 मिलियन एकड़-फीट (MAF) पानी आवंटित किया गया था। अब तक राज्य केवल 13.14 MAF पानी का ही उपयोग कर पाया है, जिससे 5 MAF से अधिक की कमी बनी हुई है। नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (NVDA) ने बसानिया और राघवपुर जैसी महत्वाकांक्षी बहुउद्देश्यीय परियोजनाओं को राज्य के पूर्ण जल आवंटन के उपयोग के लिए महत्वपूर्ण बताया है।
आदिवासी क्षेत्रों को मिलेगा सिंचाई का लाभ
मंडला और डिंडोरी जिलों में प्रस्तावित यह परियोजनाएं सिंचाई, जलविद्युत और पेयजल उपलब्ध कराने के लिए बनाई गई हैं, जिससे विशेष रूप से अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी समुदायों को लाभ मिलेगा। डिंडोरी जिले में निर्माणाधीन राघवपुर बहुउद्देश्यीय परियोजना में नर्मदा नदी पर एक बांध और 25 मेगावाट का पावरहाउस बनाया जा रहा है। इसमें एक पाइप आधारित सिंचाई प्रणाली भी शामिल है, जो दबावयुक्त पाइपलाइनों के माध्यम से माइक्रो-इरिगेशन के जरिए सीधे किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाएगी। यह परियोजना 17,587 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा प्रदान करेगी। उल्लेखनीय है कि मार्च 2025 में मध्य प्रदेश राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (SEIAA) ने इस परियोजना को पर्यावरणीय मंजूरी दे दी है, जिससे निर्माण का रास्ता साफ हो गया है।
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एक परियोजना से बहुआयामी लाभ
मंडला जिले में स्थित बसानिया परियोजना से सिंचाई नेटवर्क के माध्यम से कृषि उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। इस बांध की भंडारण क्षमता जल प्रवाह को नियंत्रित करने में मदद करेगी, जिससे सूखे के दौरान पानी की उपलब्धता सुनिश्चित होगी और मानसून में बाढ़ के जोखिम को कम किया जा सकेगा। राघवपुर की तरह, बसानिया परियोजना में भी 100 मेगावाट जलविद्युत उत्पादन और पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था है।
8 हजार हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र को मिलेगा लाभ
बसानिया परियोजना 8,780 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा प्रदान करेगी और क्षेत्र के लिए बहुआयामी सहायक प्रणाली के रूप में कार्य करेगी। सूत्रों के मुताबिक, आदिवासी समुदायों के लिए यह लाभ केवल बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये आर्थिक सशक्तिकरण, बेहतर स्वास्थ्य और सामाजिक उत्थान के अवसर भी प्रदान करते हैं।
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गुजरात को पुनः आवंटित हो सकता है पानी
सूत्रों ने चेतावनी दी है कि यदि राज्य अपने आवंटित जल का पूर्ण उपयोग नहीं कर पाता है, तो नर्मदा का पानी गुजरात को पुनः आवंटित किया जा सकता है, जिसने पहले से ही बेहतर उपयोग क्षमता दिखाई है। इससे न केवल मध्य प्रदेश के जल अधिकार कमजोर होंगे बल्कि उसके कृषि भविष्य पर भी खतरा मंडरा सकता है। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि राघवपुर और बसानिया परियोजनाओं को तेज़ी से आगे बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है। अपने हिस्से की रक्षा करने के अलावा, यह परियोजनाएं आदिवासी जिलों में सिंचाई सुरक्षा, स्वच्छ पेयजल और नवीकरणीय ऊर्जा सुनिश्चित करके व्यापक परिवर्तन ला सकती हैं।
