शिक्षक दिवस विशेष: नर्मदा किनारे लगती है घाट की पाठशाला, पराग सर के जुनून ने सैकड़ों बच्चों की बदल दी जिंदगी

Teachers Day Special Jabalpur: ग्वारीघाट पर बिना छत और बिना फीस के चल रही है घाट की पाठशाला, पराग दीवान अपनी मां की अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए 237 गरीब बच्चों को बना रहे हैं शिक्षा में निपुण।
Ghat Ki Pathshala changing lives of poor children in Jabalpur
घाट की पाठशाला, जबलपुर(सोर्स- सोशल मीडिया)
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Ghat Ki Pathshala Jabalpur: मां नर्मदा का तट, शाम का वक्त, घाट पर आरती की तैयारियां और श्रद्धालुओं की भीड़ लेकिन इसी भीड़ के दूसरी तरफ एक ऐसा नजारा भी दिखाई देता है, जो जबलपुर को एक अलग पहचान देता है। यह नजारा है प्राकृतिक वातावरण में लगने वाली घाट की पाठशाला का। नर्मदा किनारे लगने वाले इस स्कूल में न यहां कोई आलीशान स्कूल बिल्डिंग है, न महंगी स्मार्ट क्लास, न टेबल-कुर्सियां और न ही स्कूल जैसा पारंपरिक माहौल।

पराग सर कभी आश्रम तो कभी नर्मदा घाट की सीढ़ियों पर क्लास लगाते हैं इसके बावजूद यहां पढ़ने वाले बच्चे गणित, विज्ञान, अंग्रेजी और संस्कृत जैसे विषयों में ऐसी पकड़ बना रहे हैं कि उनकी प्रतिभा देखकर हर कोई हैरान रह जाता है।

मां की इच्छा बनी जिंदगी का मिशन

पराग दीवान बताते हैं कि उनका गौरीघाट से पुराना जुड़ाव रहा है। उनकी मां जब नर्मदा तट पर आती थीं तो यहां फूल-माला, दीपक बेचने, नाव चलाने वाले और दूसरे छोटे-मोटे काम करने वाले बच्चों को देखा करती थीं। इन बच्चों की स्थिति देखकर उनकी मां की इच्छा थी कि ऐसे बच्चों को शिक्षा मिलनी चाहिए। साल 2016 में पराग सर की मां की मृत्यु हो गई। मां के निधन के बाद पराग ने उनकी इसी इच्छा को अपने जीवन का मिशन बना लिया।

5 बच्चों से की थी शुरुआत

पराग सर ने जब यहां पढ़ाना शुरू किया तो महज चार-पांच बच्चों से क्लास शुरु हुई। अधिकतर बच्चे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति के चलते रोजगार या मजदूरी में माता पिता का साथ देते थे लेकिन जब पराग सर के पढ़ाने का तरीका लोगों ने देखा तो धीरे-धीरे बच्चों की संख्या बढ़ती गई और खुले आसमान के नीचे लगने वाली यह छोटी-सी क्लास एक पाठशाला बन गई। जिसमें आज 237 बच्चे नियमित पढ़ने आते हैं।

सिर्फ ज्ञान नहीं, हर परिस्थिति का सहारा

यहां पढ़ने वाले इन बच्चों में नाविकों, घाट के छोटे दुकानदारों, मजदूरों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे शामिल हैं। कई बच्चे ऐसे भी रहे हैं जिनका परिवार पढ़ाई का खर्च उठाने की स्थिति में नहीं था। पराग सर सिर्फ बच्चों को पढ़ाते ही नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर उनके स्कूल में दाखिले, किताब-कॉपी, ड्रेस और पढ़ाई से जुड़ी दूसरी जरूरतों में भी मदद करते रहे हैं। उन्होंने कई बच्चों का सरकारी और कुछ बच्चों का निजी स्कूलों में दाखिला कराने में भी सहयोग किया। यानी घाट की यह पाठशाला सिर्फ ट्यूशन सेंटर नहीं है... बल्कि उन बच्चों के लिए ऐसा सहारा है, जो आर्थिक मजबूरियों के कारण शिक्षा की मुख्यधारा से दूर हो सकते थे।

गणित की ऐसी ट्रिक कि उंगलियां बन जाती हैं कैलकुलेटर

पराग दीवान का पढ़ाने का तरीका भी इस पाठशाला को खास बनाता है। वे बच्चों को वैदिक गणित और अलग-अलग आसान ट्रिक्स के जरिए कठिन से कठिन कैलकुलेशन आसानी से समझाते हैं। जिससे छोटे छोटे बच्चे भी बड़े अंकों के स्क्वायर और क्यूब के कैलकुलेशन भी उंगलियों पर कर लेते हैं। उसके अलावा विज्ञान, अंग्रेजी, सामान्य ज्ञान और संस्कृत के साथ व्यावहारिक शिक्षा भी इस पाठशाला की खासियत है।

शिक्षा सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं

पराग के लिए शिक्षक होने का मतलब सिर्फ पाठ्यक्रम पूरा कर देना नहीं है। उनका प्रयास बच्चों के अंदर आत्मविश्वास पैदा करना है। ऐसे बच्चे जो दिन में घाट पर फूल-माला या दूसरे सामान बेचने में परिवार की मदद करते हैं, शाम को उसी घाट पर किताब लेकर बैठते हैं और यही इस पाठशाला की सबसे बड़ी तस्वीर है जहां दिन में संघर्ष दिखाई देता है, वहीं शाम को सपने आकार लेते हैं।

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प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने बढ़ाया हौसला

इस पहल की चर्चा जिला प्रशासन तक भी पहुंची। 2022 में तत्कालीन जबलपुर कलेक्टर इलैयाराजा टी ने ग्वारीघाट पहुंचकर इस पाठशाला को देखा और पराग दीवान के प्रयास की सराहना की थी। इसके बाद समय समय पर शहर के समाजसेवी और जनप्रतिनिधि भी पराग सर की मदद करते रहते हैं।

शिक्षा के व्यवसायीकरण को आईना दिखाती है घाट की पाठशाला

गौरीघाट की सीढ़ियां भले ही किसी स्कूल की तरह न दिखती हों, लेकिन यहां बैठने वाले बच्चों की आंखों में स्कूल से भी बड़े सपने हैं। इन बच्चों के पास शायद महंगी फीस देने के लिए पैसे नहीं हैं, लेकिन उनके पास एक ऐसा शिक्षक है, जो उन्हें यह विश्वास दिलाता है कि गरीबी मंजिल नहीं, सिर्फ एक चुनौती है। यह घाट की पाठशाला बड़े बड़े शिक्षा माफियाओं और सरकारी शिक्षा व्यवस्था को आइना दिखाती है और शायद शिक्षक दिवस पर पराग दीवान की कहानी का सबसे खूबसूरत संदेश है।

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