Highlights :
हाईकोर्ट ने सरकार को पूर्व आदेश के पालन के लिए 4 सप्ताह का समय दिया।
छठे वेतनमान के मामले का असर करीब 70 हजार शिक्षकों पर पड़ने की संभावना।
राजेश कुमार पांडेय सहित 497 शिक्षकों की याचिका से जुड़ा है मामला।
शिक्षकों की मांग है कि 1 जनवरी 2006 से छठे वेतनमान का लाभ मिले।
मासिक वेतन में 15 से 20 हजार रुपये के अंतर का अनुमान।
Sixth Pay Commission MP Teachers : एमपी के हजारों शिक्षकों के लिए छठे वेतनमान और बकाया एरियर को लेकर राहत की उम्मीद बढ़ गई है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर बेंच ने पूर्व आदेश का पालन करने के लिए राज्य सरकार को चार सप्ताह का समय दिया है।
ये मामला पंचायत विभाग में प्रारंभिक नियुक्ति से लेकर स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन तक की सेवा अवधि को वेतन निर्धारण में शामिल करने से जुड़ा है। इस फैसले का असर प्रदेश के करीब 70 हजार शिक्षकों पर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
जबलपुर हाईकोर्ट में राजेश कुमार पांडेय सहित 497 शिक्षकों ने याचिका दायर की थी। याचिका के मुताबिक इन शिक्षकों की प्रारंभिक नियुक्ति पंचायत विभाग में हुई थी। इसके बाद वर्ष 2006 में उन्हें अध्यापक संवर्ग में शामिल किया गया और वर्ष 2018 में स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन किया गया। शिक्षकों का कहना है कि उनकी पूर्व सेवा अवधि को वेतन निर्धारण में उचित रूप से शामिल नहीं किया गया जिसके कारण उन्हें निर्धारित वित्तीय लाभ नहीं मिल सके।
शिक्षकों की प्रमुख मांग है कि उन्हें छठे वेतनमान का लाभ एक जनवरी 2006 से दिया जाए। इसके लिए पंचायत विभाग में प्रारंभिक नियुक्ति से लेकर बाद के संविलियन तक की सेवा अवधि की गणना करने की मांग की गई है। शिक्षकों का तर्क है कि पुरानी सेवा अवधि को वेतन निर्धारण में शामिल करने से उनका वेतन सही तरीके से निर्धारित हो सकेगा और उन्हें नियमानुसार मिलने वाले वित्तीय लाभ प्राप्त हो सकेंगे।
इस मामले में शिक्षकों को मिलने वाले संभावित वित्तीय लाभ की राशि भी काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार मासिक वेतन में 15 से 20 हजार रुपये तक का अंतर होने का अनुमान है। वहीं प्रति शिक्षक बकाया एरियर की राशि सात से आठ लाख रुपये तक आंकी गई है। इसके अलावा सेवा अवधि की गणना का असर वेतनवृद्धि, वरिष्ठता और पेंशन जैसे लाभों पर भी पड़ सकता है। हालांकि, वास्तविक भुगतान संबंधित पात्रता और वेतन गणना पर निर्भर करेगा।
इस मामले में राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के पूर्व आदेश को सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) के जरिए चुनौती दी थी। जानकारी के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने 24 अगस्त 2026 को सरकार की याचिका खारिज कर दी। इसके बाद शिक्षकों ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर पूर्व आदेश का पालन कराने की मांग की।
अब हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को पूर्व आदेश का अनुपालन करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। इसके बाद शिक्षकों की नजर सरकार की अगली कार्रवाई पर है। सबसे अहम सवाल यह है कि पात्र शिक्षकों के वेतन का पुनर्निर्धारण कब तक किया जाएगा और बकाया एरियर की गणना किस प्रक्रिया से पूरी होगी। यदि आदेश के अनुसार लाभ दिए जाते हैं, तो इससे प्रदेश के हजारों शिक्षकों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।