MP राज्यसभा चुनाव विवाद: मीनाक्षी नटराजन की याचिका पर रिटर्निंग ऑफिसर समेत सभी प्रतिवादियों को नोटिस

MP Rajya Sabha Dispute: मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव विवाद पहुंचा जबलपुर हाई कोर्ट, मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त करने पर इलेक्शन कमीशन और राज्य सरकार को नोटिस जारी।
MP High Court issues notice in Rajya Sabha election dispute
मीनाक्षी नटराजन(इमेज- सोशल मीडिया)
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Meenakshi Natarajan Petition: मध्य प्रदेश के राज्यसभा चुनाव से जुड़ा हाई प्रोफाइल विवाद अब जबलपुर हाई कोर्ट पहुंच गया है। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन द्वारा दायर चुनाव याचिका पर मंगलवार को सुनवाई हुई।

जस्टिस बीपी शर्मा की एकल पीठ ने मामले को विचार योग्य मानते हुए राज्य सरकार, रिटर्निंग ऑफिसर, निर्वाचन आयोग और अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। अदालत ने सभी पक्षों को अपना जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। अब इस मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त 2026 को होगी, जिस पर राजनीतिक और कानूनी दोनों हलकों की नजर बनी हुई है।

नामांकन रद्द होने के बाद भाजपा उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए

जून 2026 में मध्य प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव प्रक्रिया शुरू हुई थी। कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया था और उन्होंने 8 जून को नामांकन दाखिल किया। अगले दिन जांच के दौरान रिटर्निंग ऑफिसर ने उनका नामांकन निरस्त कर दिया। इसके बाद चुनाव मैदान में केवल भाजपा के तीन उम्मीदवार—तरुण चुघ, रजनीश कुमार अग्रवाल और महेश केवल—बचे, जिन्हें 11 जून 2026 को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया। कांग्रेस ने इसी प्रक्रिया को चुनौती देते हुए इसे चुनावी नियमों के विपरीत बताया है।

याचिका में नामांकन रद्द करने की प्रक्रिया पर उठाए सवाल

रिटर्निंग ऑफिसर ने मीनाक्षी नटराजन का नामांकन इस आधार पर खारिज किया था कि उन्होंने अपने हलफनामे में हैदराबाद की एक अदालत में लंबित निजी आपराधिक शिकायत का उल्लेख नहीं किया। हालांकि याचिका में दावा किया गया है कि उस मामले में अदालत ने संज्ञान नहीं लिया था और न ही आरोप तय हुए थे, इसलिए उस जानकारी का खुलासा करना कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं था। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि नामांकन रद्द करने से पहले उचित अवसर नहीं दिया गया, जिससे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन हुआ।

11 अगस्त की सुनवाई पर टिकीं राजनीतिक और कानूनी नजरें

हाई कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार, रिटर्निंग ऑफिसर, इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया, मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी भोपाल और निर्विरोध चुने गए भाजपा के तीनों राज्यसभा सांसदों को प्रतिवादी बनाया है। कांग्रेस का आरोप है कि यदि उनका नामांकन रद्द नहीं किया जाता तो राज्यसभा चुनाव निर्विरोध नहीं होता और मतदान की प्रक्रिया पूरी होती।

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अब 11 अगस्त को सभी प्रतिवादी अपना जवाब अदालत में दाखिल करेंगे। इसके बाद हाई कोर्ट आगे की सुनवाई की दिशा तय करेगा। इस मामले के फैसले का असर केवल एक उम्मीदवार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राज्यसभा चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और वैधानिकता पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।

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