Jabalpur Accident: मझौली में महाकाली प्रतिमा विसर्जन के दौरान हादसा,हाईटेंशन लाइन की चपेट में आए लोग, 2 की मौत

Mahakali Visarjan Accident : मझौली में महाकाली प्रतिमा विसर्जन के दौरान 11 KV हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से दो लोगों की मौत के बाद लोगों में आक्रोश।
Majhauli Accident Death of Prince and Vikas
हादसे में विकास राजपूत और प्रिंस चौहान की मौतफोटो सोर्स - नवभारत डिजाइन
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Highlights :

  • जबलपुर के मझौली में महाकाली प्रतिमा विसर्जन के दौरान 11 KV हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से बड़ा हादसा।

  • हादसे में विकास राजपूत और प्रिंस चौहान की मौत, 7 से 8 लोगों के घायल होने की जानकारी।

  • प्रतिमा की झांकी में लगा लोहे का ढांचा बिजली के तारों के संपर्क में आने से करंट फैला।

  • घायलों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया, गंभीर घायलों को मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया।

Jabalpur Majhauli accident : जबलपुर जिले के मझौली में महाकाली प्रतिमा विसर्जन के दौरान बड़ा हादसा हो गया। सिविल लाइन वार्ड से प्रतिमा लेकर जा रही झांकी का लोहे का ढांचा हाईटेंशन बिजली लाइन के संपर्क में आ गया।

करंट की चपेट में आने से दो लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग झुलस गए। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। घायलों को उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है।

विसर्जन कुंड के पास हुआ हादसा

मझौली थाना क्षेत्र के सिविल लाइन वार्ड की महाकाली प्रतिमा को विसर्जन कुंड की ओर ले जाया जा रहा था। इसी दौरान रास्ते में झांकी में लगा लोहे का ढांचा हाईटेंशन बिजली के तारों के संपर्क में आ गया। देखते ही देखते लोहे के ढांचे में करंट फैल गया और प्रतिमा के आसपास मौजूद लोग इसकी चपेट में आ गए। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और लोगों में दहशत फैल गई।

हाईटेंशन लाइन की चपेट में आए श्रद्धालु

प्रतिमा की ऊंचाई अधिक होने के कारण रास्ते में आ रहे बिजली के तारों को लकड़ी के डंडों की मदद से ऊपर उठाने की कोशिश की जा रही थी। इसी दौरान हाईटेंशन लाइन के तार नीचे की ओर झूल गए और प्रतिमा में लगे लोहे के फ्रेम से टकरा गए। इससे लोहे के ढांचे में तेज करंट दौड़ गया। हादसे में 7 से 8 लोगों के करंट की चपेट में आने की जानकारी सामने आई है।

विकास राजपूत और प्रिंस चौहान की मौत

इस हादसे में विकास राजपूत और प्रिंस चौहान की मौत हो गई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक एक व्यक्ति ने मौके पर ही दम तोड़ दिया जबकि दूसरा युवक गंभीर रूप से झुलसने के बाद मेडिकल अस्पताल ले जाते समय मौत का शिकार हो गया। हादसे में घायल अन्य लोगों को तत्काल उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।

घायलों को मेडिकल कॉलेज किया रेफर

हादसे में घायल लोगों को पहले उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। गंभीर स्थिति को देखते हुए घायलों को मेडिकल कॉलेज रेफर किए जाने की जानकारी है। घटना के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया। मृतकों की खबर सामने आने के बाद ग्रामीणों ने थाने के सामने हंगामा शुरू कर दिया।

पुलिस ने संभाला मोर्चा, जांच जारी

घटना के बाद मौके पर मौजूद पुलिस ने लोगों को शांत कराने की कोशिश की। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया। हादसा किन परिस्थितियों में हुआ और हाईटेंशन लाइन के संपर्क में झांकी का ढांचा कैसे आया, इसकी जांच की जा रही है। इस घटना ने प्रतिमा विसर्जन के दौरान बिजली की लाइनों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

15 दिन पहले शांति समिति की बैठक में उठाया था मुद्दा

स्थानीय लोगों का आरोप है कि हादसे से करीब 15 दिन पहले शांति समिति की बैठक में हाईटेंशन लाइन नीचे होने की शिकायत की गई थी। आरोप है कि बिजली विभाग के जूनियर इंजीनियर (JE) ने लाइन ऊपर कराने का आश्वासन दिया था। लेकिन समय रहते आवश्यक काम नहीं कराया गया। अब हादसे के बाद लोग इस मामले में जिम्मेदारी तय करने और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

मृतकों के परिजनों ने JE पर कार्रवाई की मांग की

हादसे में जान गंवाने वाले विकास राजपूत और प्रिंस चौहान के परिजनों ने बिजली विभाग के JE के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने की मांग की है। परिजनों का कहना है कि यदि शिकायत पर समय रहते कार्रवाई की जाती, तो हादसे को टाला जा सकता था। हालांकि, इस मामले में संबंधित अधिकारी का पक्ष और प्रशासनिक जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी है।

मुआवजा और सरकारी नौकरी देने की मांग

मृतकों के परिवारों ने उचित मुआवजा देने के साथ परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग उठाई है। स्थानीय लोगों और करणी सेना ने भी हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि पीड़ित परिवारों को उचित सहायता मिलनी चाहिए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।

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घायलों के इलाज में देरी के भी आरोप

हादसे के बाद घायलों को अस्पताल पहुंचाने और उपचार की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि एंबुलेंस में डीजल और अस्पताल में ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध नहीं होने के कारण उपचार में देरी हुई। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

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