

Indore Fake D.Ed B.Ed Teachers : इंदौर में फर्जी D.Ed और B.Ed की डिग्री के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने वाले 51 शिक्षकों पर अब एफआईआर की कार्रवाई की तैयारी है। मामला वर्ष 2006-07 की संविदा शाला शिक्षक भर्ती से जुड़ा है। सांवेर विकासखंड के सरकारी स्कूलों में पदस्थ इन शिक्षकों पर आरोप है कि नियुक्ति के दौरान उन्होंने फर्जी शैक्षणिक दस्तावेज जमा किए थे। जांच में दस्तावेज फर्जी पाए जाने के बाद भी लंबे समय तक मामला कार्रवाई के इंतजार में रहा।
सांवेर विकासखंड में शिक्षकों की फर्जी डिग्री के आधार पर नियुक्ति की शिकायत वर्ष 2021 में सामने आई थी। शिकायत के बाद नियुक्ति के समय जमा कराई गई D.Ed और B.Ed की अंकसूचियों और डिग्रियों का संबंधित संस्थानों से सत्यापन कराया गया। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना था कि शिक्षकों ने जिन शैक्षणिक योग्यताओं के आधार पर नियुक्ति हासिल की थी, वे वास्तविक थीं या नहीं।
दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान 51 शिक्षकों की D.Ed और B.Ed की डिग्री और अंकसूचियां फर्जी पाए जाने की बात सामने आई। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ शिक्षकों ने उज्जैन, देवास और इंदौर के अलग-अलग संस्थानों से डिग्री हासिल करने का दावा किया था। सत्यापन के बाद इन दस्तावेजों की वैधता पर सवाल खड़े हुए और मामले में आगे की कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हुई।
मामले की जांच के लिए गठित समिति ने मई 2024 में अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी। इसके बाद सितंबर 2024 में संबंधित संकुल प्राचार्यों को इन शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, निर्देश जारी होने के बावजूद लंबे समय तक पुलिस में एफआईआर दर्ज नहीं हो सकी। अब करीब दो दशक पुराने इस मामले में एक बार फिर कार्रवाई तेज होने की स्थिति बनी है।
मामले में इंदौर जिला शिक्षा अधिकारी शौर्य मल्होत्रा ने अब 51 शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद संबंधित शिक्षकों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है। एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल और उनके आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने से जुड़े पूरे मामले की जांच करेगी।
आरोप है कि फर्जी डिग्री के आधार पर इन शिक्षकों ने करीब 20 साल तक सरकारी नौकरी की। इस दौरान कुछ शिक्षक पदोन्नति भी पा चुके हैं। अब यह भी देखा जा रहा है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति पाने के बाद संबंधित शिक्षकों को अब तक कितना वेतन और अन्य वित्तीय लाभ मिला। अधिकारियों के प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक पूरी अवधि के वेतन और अन्य लाभों की गणना होने पर वसूली की राशि करोड़ों रुपये तक पहुंच सकती है।
एफआईआर दर्ज होने के बाद इंदौर पुलिस फर्जी डिग्री हासिल करने, दस्तावेज तैयार कराने और उनका सरकारी नौकरी में इस्तेमाल करने से जुड़े तथ्यों की जांच करेगी। साथ ही यह भी जांच का विषय होगा कि नियुक्ति के समय जमा किए गए दस्तावेजों का सत्यापन कैसे हुआ और करीब दो दशक तक फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी करने का मामला सामने क्यों नहीं आया।