जबलपुर में कंटेनर से 4.35 करोड़ का 871 किलो गांजा जब्त, पेंट के 412 डिब्बों के बीच छिपाई थीं 28 बोरियां

Jabalpur Ganja Smuggling : जबलपुर में पुलिस ने कंटेनर से 871 किलो 95 ग्राम गांजा जब्त किया। पेंट के 412 डिब्बों के बीच 28 बोरियां छिपी थीं। यूपी और पश्चिम बंगाल के दो आरोपी गिरफ्तार हुए।
Jabalpur Police Ganja Seized
जबलपुर पुलिस ने जब्त किया गांजाफोटो सोर्स- नवभारत
Published on: 
Updated on: 

Highlights:

  • जबलपुर में कंटेनर से 871 किलो 95 ग्राम गांजा जब्त, दो आरोपी गिरफ्तार।

  • पेंट के 412 डिब्बों के बीच छिपाकर रखी गई थीं गांजे की 28 बोरियां।

  • जब्त गांजे की कीमत 4.35 करोड़ रुपये।

  • एनएच-30 पर मुस्करा मोड़ के पास पुलिस ने शुरू की थी वाहन चेकिंग।

Jabalpur 871 Kg Ganja Seized : जबलपुर में पुलिस ने गांजा तस्करी के बड़े मामले का खुलासा किया है। कंटेनर में पेंट के 412 डिब्बों के बीच गांजे की 28 बोरियां छिपाकर ले जाई जा रही थीं। क्राइम ब्रांच और गोसलपुर थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए 871 किलो 95 ग्राम गांजा जब्त किया है।

जब्त गांजे की कीमत 4.35 करोड़ रुपये बताई जा रही है। मौके से उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के रहने वाले दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अब इस तस्करी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटा रही है।

मुखबिर की सूचना पर एनएच-30 पर बिछाया जाल

जबलपुर पुलिस को 30 अक्टूबर 2026 को मुखबिर से सूचना मिली थी कि एक कंटेनर के जरिए भारी मात्रा में गांजे की तस्करी की जा रही है। इसके बाद क्राइम ब्रांच और गोसलपुर थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने एनएच-30 पर मुस्करा मोड़ के पास वाहन चेकिंग शुरू की। इसी दौरान जबलपुर की तरफ से आ रहे कंटेनर क्रमांक NL-01-AC-7191 को रोकने का प्रयास किया गया, लेकिन चालक ने रफ्तार बढ़ाकर भागने की कोशिश की। पुलिस ने पीछा करते हुए मोहतरा टोल के पास घेराबंदी की और कंटेनर को रोक लिया। उसमें सवार दोनों व्यक्तियों ने भागने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया।

पेंट के डिब्बों के बीच छिपाकर रखी थीं गांजे की 28 बोरियां

कंटेनर की तलाशी के दौरान पेंट के डिब्बों के बीच 28 बोरियां मिलीं। इनमें खाकी रंग के टेप से पैक किए गए गांजे के पैकेट छिपाकर रखे गए थे। पुलिस ने कुल 871 किलो 95 ग्राम गांजा जब्त किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान धर्मवीर सिंह (45), निवासी अलीगढ़, उत्तर प्रदेश और विक्रम करमाकर (24), निवासी दक्षिण दिनाजपुर, पश्चिम बंगाल के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, तस्करी में इस्तेमाल कंटेनर में पेंट के 412 डिब्बे भी रखे हुए थे, जिनकी आड़ में गांजे की खेप ले जाई जा रही थी।

ओडिशा के प्रभात साहू पर गांजा पहुंचाने का आरोप

पूछताछ में कंटेनर चालक धर्मवीर सिंह ने बताया कि वह 18 अक्टूबर को अपने साथी विक्रम के साथ विशाखापट्टनम से माल लेकर निकला था। उसे 19 अक्टूबर को अंबाला पहुंचना था। चालक के मुताबिक, रास्ते में ओडिशा के बलांगीर निवासी प्रभात साहू का फोन आया। उसने मध्य प्रदेश में गांजा पहुंचाने के लिए कहा था। आरोपी के बयान के अनुसार, 27 अक्टूबर को प्रभात साहू के यहां से गांजे की 28 बोरियां कंटेनर में लोड की गई थीं। खेप को मैहर पहुंचने से पहले एक पेट्रोल पंप के पास उतारने के निर्देश दिए गए थे।

एक खेप पहुंचाने के मिलते थे एक लाख रुपये

जबलपुर में गांजा जब्त मामले में पुलिस पूछताछ में आरोपी ने कथित तौर पर बताया कि वह पहले भी प्रभात साहू के कहने पर कई बार मध्य प्रदेश में गांजा पहुंचा चुका है। इसके बदले उसे प्रत्येक खेप के लिए एक लाख रुपये मिलते थे। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि गांजे की खेप कहां से लाई गई थी और इसे मध्य प्रदेश में किसे सप्लाई किया जाना था। जांच में तस्करी के नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।

Jabalpur Police Ganja Seized
जबलपुर: महाधिवक्ता कार्यालय के उद्घाटन में पहुंचे सीएम, राहुल गांधी पर कसा तंज, शहपुरा में पी कुल्हड़ चाय

यूपी नारकोटिक्स की टीम भी कर रही थी कंटेनर का पीछा

कंटेनर की जांच के दौरान उत्तर प्रदेश के झांसी की नारकोटिक्स विंग की टीम भी मौके पर पहुंच गई। टीम काफी समय से इस कंटेनर का पीछा कर रही थी। हाईवे पर कंटेनर को पुलिस के कब्जे में देखकर यूपी नारकोटिक्स टीम ने जबलपुर पुलिस को मामले से जुड़ी जानकारी दी। इसके बाद दोनों एजेंसियां तस्करी के नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुट गईं।

एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज

जबलपुर पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/20 और 29 के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस और यूपी नारकोटिक्स की टीम मिलकर पूरे नेटवर्क की जांच कर रही हैं। जांच का मुख्य फोकस गांजे की खेप के वास्तविक सप्लायर, मध्य प्रदेश में इसे प्राप्त करने वाले व्यक्ति और तस्करी में शामिल अन्य लोगों की पहचान करना है।