

Usha Thakur Garba Statement : बीजेपी नेता और पूर्व मंत्री ऊषा ठाकुर ने गरबा आयोजनों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर बयान दिया है। उन्होंने दावा किया कि गरबे के दौरान बड़ी संख्या में लड़कियां विधर्मियों के साथ चली जाती हैं और इसका असर जनसांख्यिकी परिवर्तन पर पड़ता है। हालांकि, अपने इस दावे के समर्थन में उन्होंने कोई आंकड़ा या स्रोत प्रस्तुत नहीं किया।
ऊषा ठाकुर ने कहा कि विभिन्न संगठनों ने यह प्रण लिया है कि जो लोग मूर्ति पूजा नहीं करते, उन्हें गरबा पंडालों में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग तिलक और कलावा लगाकर गरबा पंडालों में प्रवेश करते हैं और बेटियों को भ्रमित करने का प्रयास करते हैं।
ऊषा ठाकुर ने दावा किया कि पूरे वर्ष में गरबे के दौरान 4.5 लाख लड़कियां विधर्मियों के साथ चली जाती थीं। उन्होंने कहा कि ये वयस्क बेटियां अगले वर्ष एक बच्चे को जन्म देती हैं और उनके अनुसार इससे हर साल 9 लाख की दर से जनसंख्या परिवर्तन पर असर पड़ रहा है। इस दावे के समर्थन में उन्होंने कोई स्रोत या आंकड़ा नहीं बताया।
गरबा के स्वरूप को लेकर भी ऊषा ठाकुर ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि गरबा शक्ति की साधना का पर्व है, लेकिन व्यावसायिक आयोजनों के कारण इसका स्वरूप बदल गया है। उनके मुताबिक कई जगह गरबा अब ड्रेसेस, गहनों और टैटू के प्रदर्शन का माध्यम बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि नवरात्रि का उद्देश्य मातृशक्ति के व्यक्तित्व विकास और धर्म-संस्कृति के प्रति जागरूकता से जुड़ा होना चाहिए।
ऊषा ठाकुर ने राहुल गांधी के कार्यक्रम में हुए गीत-संगीत को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के बीच होने वाले कार्यक्रमों में नैतिकता, राष्ट्रवाद और कर्तव्यनिष्ठा से जुड़े विषयों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने कार्यक्रम में हुए डांस को वल्गर बताया और इसे कांग्रेस की शैली से जोड़कर टिप्पणी की।
कार्यक्रम में कॉमेडियन द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिमिक्री किए जाने के सवाल पर ऊषा ठाकुर ने कहा कि जब मुद्दों में दम नहीं होता तो मिमिक्री करने वालों को बुलाना पड़ता है। उन्होंने प्रधानमंत्री के भाषण की मिमिक्री में ‘मां’ शब्द के इस्तेमाल पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना था कि मां पावन शब्द है और ऐसे शब्द को मंच से मजाक का विषय बनाया जाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार नेताओं का इसमें शामिल होना दुखद है और यह उनके संस्कारों को भी परिलक्षित करता है।