इंदौर में उज्ज्वल निकम ने साझा किए अनसुने किस्से, संजय दत्त की सजा से कसाब के मुकदमे तक के अनुभव बताए

Prahar The Untold Story of Ujjwal Nikam : उज्ज्वल निकम ने संजय दत्त, 1993 मुंबई बम धमाकों और अजमल कसाब केस से जुड़े अनुभव साझा किए। उन्होंने महिला सुरक्षा और अपनी बायोपिक ‘प्रहार’ पर भी बात की।
Ujjwal Nikam speaks at an event in Indore
कार्यक्रम में मौजूद उज्जवल निकमफोटो सोर्स- नवभारत
Published on: 
Updated on: 

Highlights:

  • उज्ज्वल निकम ने 1993 मुंबई बम धमाकों और संजय दत्त से जुड़े मामले का अनुभव साझा किया।

  • आर्थर रोड जेल में केस की तैयारी और अजमल कसाब के मुकदमे पर बात की।

  • न्याय व्यवस्था में भरोसा बनाए रखने और महिला सुरक्षा के मुद्दे उठाए।

  • गंभीर मामलों में अपील और दया याचिकाओं के निपटारे में तेजी लाने की जरूरत बताई।

  • उनकी बायोपिक ‘प्रहार: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ उज्ज्वल निकम’ 16 अक्टूबर को रिलीज होगी।

Indore Ujjwal Nikam : इंदौर में आयोजित एक कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिवक्ता उज्ज्वल निकम ने 1993 के मुंबई बम धमाकों, अभिनेता संजय दत्त से जुड़े मामले और 26/11 मुंबई आतंकी हमले के दोषी अजमल कसाब के मुकदमे से जुड़े अनुभव साझा किए। उन्होंने वकालत के सफर, न्याय व्यवस्था, महिला सुरक्षा और गंभीर आपराधिक मामलों में न्याय मिलने में होने वाली देरी पर भी अपनी बात रखी। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल हुए।

उज्ज्वल निकम ने 12 मार्च 1993 को मुंबई में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले का जिक्र करते हुए अभिनेता संजय दत्त से जुड़ा किस्सा सुनाया। उन्होंने बताया कि जब संजय दत्त को सात साल कैद की सजा सुनाई गई, तब वह कटघरे में घबराने लगे थे। निकम के मुताबिक, उस समय उन्होंने संजय दत्त के पास जाकर उन्हें सलाह दी, जिसके बाद वह शांत हुए। निकम ने कहा कि संजय दत्त ने आगे बढ़ने के लिए मिली सलाह और सजा, दोनों को स्वीकार किया।

आर्थर रोड जेल में 13 साल तक की केस की तैयारी

उज्ज्वल निकम ने बताया कि मुंबई बम धमाकों के मामले की जिम्मेदारी मिलने के बाद उन्हें जलगांव से मुंबई जाना पड़ा। वह सुबह 11 बजे से शाम 6 बजे तक आर्थर रोड जेल में रहकर मामले का अध्ययन करते और केस से जुड़े पहलुओं पर काम करते थे। उन्होंने बताया कि इस मामले पर करीब 13 साल तक काम किया। कार्यक्रम में उन्होंने 26/11 मुंबई आतंकी हमले के दोषी अजमल कसाब के मुकदमे से जुड़े कानूनी संघर्षों के अनुभव भी साझा किए।

पिता की इच्छा पर चुनी वकालत

अपने पेशेवर सफर के बारे में बात करते हुए निकम ने बताया कि वह डॉक्टर बनना चाहते थे, लेकिन उनके पिता की इच्छा थी कि वह एक अच्छे अधिवक्ता बनें। बीएससी की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने वकालत का रास्ता चुना। उन्होंने अपने पिता से अनुशासन में रहने की सीख मिलने की बात भी कही। वकीलों की भूमिका पर निकम ने कहा कि वकालत के पेशे में आरोपी का मुकदमा अंत तक लड़ना और उसे कानूनी सहायता देना महत्वपूर्ण है।

न्याय व्यवस्था पर भरोसा बनाए रखने की जरूरत

कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत में निकम ने कहा कि भारतीयों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा कायम है, लेकिन इस विश्वास को बनाए रखने के लिए न्यायाधीशों को गंभीरता से विचार करना होगा। जेन-जी आंदोलन से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि विभिन्न आंदोलनों के माध्यम से लोगों में विश्वास पैदा होता है।

महिला सुरक्षा के मामलों में न्याय मिलने में देरी पर चिंता

महिला सुरक्षा के मुद्दे पर निकम ने गंभीर आपराधिक मामलों में न्याय मिलने में होने वाली देरी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि निचली अदालत से फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद भी हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में अपीलों के निपटारे में कई साल लग सकते हैं। उन्होंने दया याचिकाओं के निपटारे की प्रक्रिया में भी तेजी लाने की जरूरत बताई।

Ujjwal Nikam speaks at an event in Indore
Special: गांधीसागर को सालभर टूरिस्ट डेस्टिनेशन बनाने की तैयारी, कलेक्टर दिव्यांक ने नवभारत से की खास चर्चा

16 अक्टूबर को रिलीज होगी उज्ज्वल निकम की बायोपिक

उज्ज्वल निकम के जीवन और चर्चित मुकदमों पर आधारित फिल्म ‘प्रहार: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ उज्ज्वल निकम’ 16 अक्टूबर को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। अविनाश अरुण धवारे के निर्देशन और मैडॉक फिल्म्स के निर्माण में बनी इस फिल्म में राजकुमार राव उज्ज्वल निकम की भूमिका निभा रहे हैं। फिल्म में वामिका गब्बी, जयदीप अहलावत और सिकंदर खेर भी नजर आएंगे। निकम ने बताया कि शुरुआत में उन्होंने निर्माता से पूछा था कि एक वकील के जीवन पर फिल्म क्यों बनाई जा रही है। फिल्म के उद्देश्य और जानकारी लेने के बाद उन्होंने इसके लिए सहमति दी।

Navbharat Live
navbharatlive.com