

Rahul Gandhi Indore Chhatron Ki Goonj: इंदौर में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में राहुल गांधी ने मंच से छात्रों के साथ सीधे संवाद किया। छात्रों ने भर्ती परीक्षाओं, रिजल्ट जारी नहीं होने, पदों पर होल्ड और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्याएं साझा कीं।
एक छात्र ने दावा किया कि मध्य प्रदेश में पिछले आठ वर्षों में हुई भर्तियों में भ्रष्टाचार की शिकायतें सामने आती रही हैं और करीब 10 हजार पद होल्ड पर हैं। छात्र ने कहा कि उम्मीदवारों को बार-बार 13 प्रतिशत का हवाला देकर इंतजार कराया जा रहा है। कार्यक्रम का फोकस शिक्षा, रोजगार, भर्ती परीक्षाओं और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर था। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि आज का सिस्टम अंधभक्त चाहता है।
संवाद के दौरान नर्सिंग छात्रा याशिका दानी ने अपनी पढ़ाई से जुड़ी परेशानी राहुल गांधी के सामने रखी। उन्होंने कहा कि एडमिशन के समय उम्मीद थी कि चार साल में कोर्स पूरा हो जाएगा, लेकिन परीक्षाएं नहीं होने से डिग्री पूरी नहीं हो पा रही है। उन्होंने कहा कि इससे मध्यप्रदेश के हजारों विद्यार्थी प्रभावित हो रहे हैं। छात्रों की बातें सुनने के बाद राहुल गांधी ने कहा कि लगभग हर विद्यार्थी ने किसी न किसी रूप में ‘सिस्टम’ से जुड़ी समस्या की बात की है। इससे पहले कार्यक्रम के बारे में भी बताया गया था कि इसमें छात्रों से शिक्षा, रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर सीधा संवाद किया जाना है।
छात्रों से बातचीत के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि शिक्षा कोई लग्जरी नहीं, बल्कि छात्रों का अधिकार है। उन्होंने सिस्टम और शिक्षा व्यवस्था को लेकर अपनी बात रखी। मंच पर इस दौरान विभिन्न उद्योगपतियों और नेताओं की तस्वीरें भी दिखाई गईं। राहुल गांधी ने अपने संबोधन में व्यवस्था पर प्रभावशाली लोगों के नियंत्रण का आरोप लगाया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लेते हुए कहा कि सिस्टम उनके नेतृत्व में चल रहा है।
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में अजीत डोभाल, गौतम अडानी और मुकेश अंबानी का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि देश की विभिन्न संस्थाओं पर प्रभावशाली लोगों का कब्जा है। राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों की समस्याओं को समझने के लिए पूरे सिस्टम को समझना जरूरी है। उन्होंने केंद्र सरकार और प्रभावशाली उद्योगपतियों के बीच संबंधों को लेकर भी सवाल उठाए। हालांकि, कार्यक्रम में राहुल गांधी द्वारा लगाए गए इन आरोपों को उनके राजनीतिक दावों के रूप में देखा जाना चाहिए; संबंधित पक्षों का पक्ष इस कार्यक्रम के दौरान इन टिप्पणियों पर उपलब्ध नहीं है।