तुलसी सिलावट की विधानसभा में कैलाश विजयवर्गीय के फोटो पोस्टरों से गायब, शहर में शुरू हुई सियासी चर्चा
Poster Politics at Indore: इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर के भूमिपूजन कार्यक्रम में विकास कार्यों के साथ पोस्टर पॉलिटिक्स भी चर्चा में रही। कार्यक्रम से पोस्टरों से कैलाश विजयवर्गीय का फोटो गायब था ।
- Reported By: अंशुल मुकाती
सावेर विधानसभा में लगाये गए बैनर पोस्टर (फोटो सोर्स - नवभारत )
Indore Poster Politics: इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर के भूमिपूजन कार्यक्रम के दौरान विकास परियोजना के साथ-साथ पोस्टर पॉलिटिक्स भी चर्चा का विषय बन गई। कार्यक्रम स्थल और आसपास के क्षेत्र में स्थानीय विधायक एवं मंत्री तुलसी सिलावट के समर्थकों की ओर से बड़ी संख्या में स्वागत बैनर और होर्डिंग लगाए गए थे, लेकिन इनमें प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की तस्वीर नजर नहीं आई, जबकि मंच पर खुद कैलाश विजयवर्गीय मौजूद थे ।
तुलसी समर्थकों के बैनरों पर स्थानीय नेताओं को मिली जगह
कार्यक्रम को लेकर लगाए गए अधिकांश पोस्टरों में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर, मंत्री तुलसी सिलावट और अन्य स्थानीय नेताओं के फोटो प्रमुखता से लगाए गए। हालांकि, इंदौर की राजनीति के अहम चेहरों में शामिल मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की तस्वीरों का नहीं होना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया।
राजनीतिक हलकों में शुरू हुई चर्चाएं
भाजपा के दो वरिष्ठ नेताओं के समर्थकों के बीच पोस्टर पॉलिटिक्स को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। राजनीतिक जानकार इसे स्थानीय शक्ति प्रदर्शन और क्षेत्रीय राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि, इसे लेकर किसी भी नेता या भाजपा संगठन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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विकास कार्यक्रम से ज्यादा चर्चा पोस्टरों की
इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर का भूमिपूजन प्रदेश की महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं में शामिल है, लेकिन कार्यक्रम के दौरान लगे बैनर और होर्डिंग भी लोगों का ध्यान खींचते रहे। सोशल मीडिया पर भी तुलसी सिलावट के पोस्टरों की तस्वीरें साझा की जा रही हैं और कैलाश विजयवर्गीय की गैरमौजूदगी को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
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सियासी संदेश या महज संयोग
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बड़े आयोजनों में नेताओं के फोटो और पोस्टरों की मौजूदगी या गैरमौजूदगी अक्सर राजनीतिक संदेश के रूप में देखी जाती है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि कैलाश विजयवर्गीय के फोटो का न होना महज संयोग था या इसके पीछे कोई रणनीति, लेकिन कार्यक्रम के बाद यह मुद्दा राजनीतिक चर्चा का केंद्र जरूर बन गया।
