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इंदौर के DAVV ऑडिटोरियम में 'जेन-जी चर्चा' कार्यक्रम आयोजित हुआ।
कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय महाराज ने युवाओं से करियर, संस्कार और रिश्तों पर संवाद किया।
बोले- केवल पैसा कमाना नहीं, प्रसन्नता को भी जीवन का लक्ष्य बनाएं।
'जेन-जी' नाम पर सवाल उठाते हुए भारतीय संस्कृति की सोच का उदाहरण दिया।
राजनीति में युवाओं को अवसर देने और उनकी क्षमताओं पर भरोसा करने की बात कही।
Indresh Upadhyay Maharaj youth interaction : इंदौर में प्रसिद्ध कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय महाराज ने युवाओं से संवाद करते हुए करियर, रिश्तों, संस्कार, सोशल मीडिया और राष्ट्र निर्माण जैसे मुद्दों पर अपने विचार शेयर किए।
देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम में आयोजित 'जेन-जी चर्चा, डीएवीवी एडिशन' में उन्होंने कहा कि जीवन का लक्ष्य केवल पैसा कमाना नहीं, बल्कि प्रसन्नता और आत्मसंतोष हासिल करना भी होना चाहिए। उन्होंने युवाओं की भावनाओं को समझने और उनकी क्षमताओं पर भरोसा करने की जरूरत पर जोर दिया।
अपने संबोधन में इंद्रेश उपाध्याय महाराज ने 'जेन-जी' नाम को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ये नाम किसने रखा, इसकी जानकारी नहीं है लेकिन इसमें पाश्चात्य सोच दिखाई देती है। उन्होंने अंग्रेजी वर्णमाला के अंतिम अक्षर 'Z' का उल्लेख करते हुए भारतीय संस्कृति की उस सोच का उदाहरण दिया जिसमें अंत को भी नई शुरुआत का अवसर माना जाता है। उनके मुताबिक भारतीय परंपरा जीवन को नई संभावनाओं और अवसरों के नजरिए से देखने की प्रेरणा देती है।
महाराज ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी पर भौतिक जीवनशैली और पाश्चात्य प्रभाव का असर दिखाई देता है। ऐसे में केवल धन कमाने को सफलता का पैमाना नहीं बनाना चाहिए। उन्होंने युवाओं को जीवन में रिश्तों, संस्कारों, संतुलन और आत्मसंतोष को भी महत्व देने की सलाह दी। उनके अनुसार आर्थिक उपलब्धियों के साथ मानसिक संतुष्टि और प्रसन्नता भी जरूरी हैं।
राजनीति में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने की जरूरत पर भी इंद्रेश उपाध्याय महाराज ने बात रखी। उन्होंने कहा कि युवाओं की काबिलियत पर भरोसा करके उन्हें आगे आने के अवसर दिए जाने चाहिए। उनकी ऊर्जा नए विचार और क्षमताएं समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में योगदान दे सकती हैं।
इंदौर शहर में महाराज ने युवाओं में सहनशीलता की कमी पर चिंता जताते हुए विपरीत परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने की बात कही। उन्होंने क्रिकेटर विराट कोहली, सचिन तेंदुलकर और महेंद्र सिंह धोनी का उदाहरण देते हुए कहा कि चुनौतियों के बीच भी अपने कर्म और लक्ष्य के प्रति समर्पित रहना जरूरी है।
सोशल मीडिया और भक्ति के संबंध पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान की आराधना में समय, ध्यान और मन का जुड़ाव महत्वपूर्ण है। भक्ति को केवल सोशल मीडिया पर प्रभाव दिखाने का माध्यम बनाने के बजाय उसके व्यक्तिगत और आत्मिक पक्ष को प्राथमिकता देनी चाहिए। उनके अनुसार भगवान के प्रति भक्त का निजी भाव ही आराधना का महत्वपूर्ण आधार है।