इंदौर पश्चिम रिंग रोड परियोजना: मुआवजे की मांग को लेकर किसानों का भोपाल कूच, पुलिस ने रोका, आंसू गैस छोड़ी

Barlai Farmers Protest: इंदौर पश्चिम रिंग रोड परियोजना के विरोध में किसान भोपाल कूच के लिए निकले। बरलाई में पुलिस ने रोका, आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। किसान 4 गुना मुआवजा मांग रहे हैं।
Indore West Ring Road Farmers Protest
किसानों का प्रदर्शन (फोटो सोर्स- नवभारत)
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Indore West Ring Road Farmers Protest: इंदौर की पश्चिम रिंग रोड परियोजना को लेकर किसानों का विरोध एक बार फिर उग्र हो गया है। अधिग्रहित की जा रही जमीन के उचित मुआवजे की मांग को लेकर बड़ी संख्या में किसान भोपाल कूच के लिए निकले, लेकिन पुलिस ने उन्हें बरलाई गांव के पास रोक दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव की स्थिति बन गई।

करणी सेना के नेतृत्व में आयोजित इस आंदोलन में 39 गांवों के किसान शामिल हुए। सुबह इंदौर से करीब 100 से अधिक ट्रैक्टर और सैकड़ों कारों का काफिला भोपाल के लिए रवाना हुआ था। आंदोलनकारी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को ज्ञापन सौंपने जा रहे थे।

चार गुना मुआवजे की मांग

प्रदर्शनकारी किसानों की प्रमुख मांग है कि पश्चिम रिंग रोड परियोजना के लिए अधिग्रहित की जा रही जमीन का चार गुना मुआवजा दिया जाए। इसके साथ ही गाइडलाइन दरों में बढ़ोतरी कर किसानों को उचित मुआवजा सुनिश्चित किया जाए।

पुलिस ने रोका, आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल

बरलाई गांव के पास पुलिस ने किसानों को आगे बढ़ने से रोक दिया। पुलिस और किसानों के बीच काफी देर तक समझाइश का दौर चला, लेकिन प्रदर्शनकारी आगे बढ़ने पर अड़े रहे। स्थिति तनावपूर्ण होने पर पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए दो बार रेड चिली आंसू गैस के गोले छोड़े और वाटर कैनन का भी इस्तेमाल किया। इसके बाद हल्का बल प्रयोग भी किया गया। इस दौरान कुछ युवकों को हिरासत में लिया गया।

सड़क पर धरने पर बैठे किसान

पुलिस कार्रवाई के बाद नाराज किसान बरलाई गांव में ही सड़क पर धरने पर बैठ गए। किसान नेताओं ने कहा कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा और आवश्यकता पड़ने पर इसे और व्यापक किया जाएगा।

किसानों और प्रशासन के अपने-अपने दावे

आंदोलनकारी किसानों का आरोप है कि सरकार बिना उचित मुआवजा दिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है, जिससे हजारों परिवार प्रभावित होंगे। वहीं प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है और किसानों से बातचीत के जरिए समाधान निकालने का प्रयास किया जा रहा है। पश्चिम रिंग रोड परियोजना को लेकर किसानों और प्रशासन के बीच टकराव ने एक बार फिर प्रदेश की राजनीति और भूमि अधिग्रहण के मुद्दे को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

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