

इंदौर में कम बारिश से पेयजल संकट की आशंका, अभी से 300 टैंकरों से सप्लाई।
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने CM मोहन यादव से मांगा 50 करोड़ का पैकेज।
यशवंत सागर और बिलावली तालाब में जल संग्रहण बढ़ाने पर जोर।
नर्मदा-गंभीर लिंक परियोजना से जल स्रोतों को भरने की योजना पर चर्चा।
Indore Prepares for Water Crisis: इंदौर में इस वर्ष कम बारिश के चलते आने वाले दिनों में पेयजल संकट की आशंका बढ़ने लगी है। आमतौर पर गर्मियों में पानी की कमी होने पर टैंकरों के जरिए जलापूर्ति की जरूरत पड़ती थी।
इस बार स्थिति यह है कि गर्मियों से पहले ही शहर में करीब 300 टैंकरों के माध्यम से पानी की सप्लाई की जा रही है। ऐसे में आने वाले महीनों में जलापूर्ति व्यवस्था को लेकर नगर निगम की चुनौती बढ़ सकती है।
शहर में बारिश से पहले ही पानी बचाने की कवायद शुरू हो गई है। गरबा पंडालों और अन्य सामाजिक आयोजनों के माध्यम से लोगों को जल संरक्षण का संदेश दिया जा रहा है। प्रशासन और नगर निगम के सामने सबसे बड़ी चुनौती उपलब्ध जल स्रोतों में पानी का पर्याप्त भंडारण बनाए रखने और आने वाले समय में शहर की जरूरतों के मुताबिक जलापूर्ति सुनिश्चित करने की है।
जल संकट की संभावनाओं को देखते हुए महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने भोपाल प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से सौजन्य भेंट की। इस दौरान उन्होंने इंदौर की पेयजल व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए 50 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज की मांग रखी। महापौर ने सीएम को कम बारिश के कारण भविष्य में पैदा हो सकने वाली जल संकट की स्थिति से अवगत कराया।
इंदौर शहर की जलप्रदाय व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले यशवंत सागर और बिलावली तालाब में जल संग्रहण बढ़ाने को लेकर भी मुख्यमंत्री के साथ चर्चा हुई। महापौर ने नर्मदा-गंभीर लिंक परियोजना के माध्यम से यशवंत सागर तालाब को भरने की संभावनाओं पर विचार करने की बात रखी। इसके साथ ही परियोजना की चैनल के माध्यम से बिलावली तालाब तक पानी पहुंचाने और जरूरत के अनुसार दोनों जल स्रोतों में पानी छोड़े जाने के विषय पर भी चर्चा की गई। इसका उद्देश्य आने वाले समय में शहर की पेयजल जरूरतों के लिए अतिरिक्त जल उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
इंदौर में जल संकट की आशंका के बीच पानी बचाने के लिए जनजागरूकता पर भी जोर दिया जा रहा है। गरबा पंडालों और सामाजिक कार्यक्रमों में जल संरक्षण के संदेश दिए जा रहे हैं, ताकि नागरिक पानी की खपत को लेकर सतर्क रहें। हालांकि, शहर में करीब 300 टैंकरों से हो रही जलापूर्ति और विशेष पैकेज की मांग यह संकेत देती है कि इस बार पेयजल व्यवस्था को लेकर पहले से तैयारी करने की जरूरत है। अब निगाहें आगामी बारिश, जल स्रोतों में होने वाले संग्रहण और नर्मदा-गंभीर लिंक परियोजना के जरिए पानी उपलब्ध कराने की संभावनाओं पर रहेंगी।
इंदौर के सामने सबसे बड़ी चुनौती कम बारिश के बीच शहर की पेयजल जरूरतों को पूरा करना है। गर्मियों से पहले ही करीब 300 टैंकरों से पानी की सप्लाई होना जल प्रबंधन पर बढ़ते दबाव की ओर इशारा कर रहा है। ऐसे में यशवंत सागर और बिलावली तालाब में पर्याप्त जल संग्रहण सुनिश्चित करने, नर्मदा-गंभीर लिंक परियोजना के जरिए अतिरिक्त पानी उपलब्ध कराने और जल संरक्षण के लिए लोगों को जागरूक करने की जरूरत है।
इंदौर में आने वाले समय में जल संकट कितना गंभीर होगा, यह बारिश और जल स्रोतों में पानी की उपलब्धता पर निर्भर करेगा। फिलहाल, महापौर की ओर से 50 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज की मांग और जल स्रोतों में अतिरिक्त पानी पहुंचाने की योजना ने पेयजल व्यवस्था को लेकर तैयारियों को चर्चा में ला दिया है।