

Indore Rural Police Leave Order: इंदौर ग्रामीण पुलिस विभाग में अवकाश स्वीकृति प्रक्रिया को लेकर जारी एक आदेश ने प्रशासनिक हलकों में बहस छेड़ दी है। ग्रामीण पुलिस अधीक्षक (एसपी) राजेंद्र कुमार वर्मा ने 29 मई को एक आदेश जारी कर जिले के सभी थाना और चौकी प्रभारियों को निर्देश दिए थे।
निर्देश के अनुसार किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को अवकाश पर भेजने से पहले निर्धारित स्तर पर अनुमति लेना अनिवार्य होगा। इस आदेश का उद्देश्य अवकाश प्रक्रिया को अधिक नियंत्रित और व्यवस्थित बनाना बताया गया था।
जारी निर्देशों में स्पष्ट किया गया था कि 30 दिन से अधिक अवधि के अवकाश की स्वीकृति स्वयं एसपी स्तर से दी जाएगी। वहीं, कम अवधि के अवकाशों की मंजूरी की जिम्मेदारी संबंधित डीएसपी और थाना प्रभारियों को सौंपी गई थी। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया था कि कई बार कर्मचारी बिना वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में लाए अवकाश पर चले जाते हैं, जिससे कानून-व्यवस्था और संवेदनशील ड्यूटी प्रभावित होती है। इसी वजह से अवकाश प्रक्रिया पर प्रभावी नियंत्रण की आवश्यकता बताई गई थी।
एसपी के आदेश के सामने आते ही पुलिस विभाग के भीतर असंतोष की स्थिति बन गई। कई थाना प्रभारी और अन्य अधिकारियों ने इस व्यवस्था पर आपत्ति जताई। उनका मानना था कि अवकाश स्वीकृति से जुड़ी प्रक्रिया पहले से निर्धारित नियमों के तहत संचालित होती है और नए आदेश से प्रशासनिक जटिलताएं बढ़ सकती हैं। मामला धीरे-धीरे विभागीय स्तर से आगे बढ़कर उच्च अधिकारियों तक पहुंच गया, जिसके बाद इसकी समीक्षा शुरू की गई।
मामले की समीक्षा के बाद इंदौर रेंज के आईजी अनुराग सिंह ने 2 जून को एसपी द्वारा जारी आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया। आईजी ने अपने आदेश में कहा कि यह निर्देश मध्यप्रदेश सिविल सेवा (अवकाश) नियम 2025 तथा पुलिस मुख्यालय भोपाल द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं है।
आदेश निरस्त होने के बाद अब इंदौर ग्रामीण पुलिस रेंज में प्रशासनिक अधिकारों और अवकाश स्वीकृति प्रक्रिया को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। विभागीय स्तर पर इस पूरे घटनाक्रम को प्रशासनिक अधिकारों और नियमों की व्याख्या से जोड़कर देखा जा रहा है।