इंदौर में करोड़ों की सड़क मरम्मत पर सवाल, जनकार्य प्रभारी के घर से कुछ दूर धंसी सड़क, 17 दिन में तीसरी घटना

Indore Municipal Corporation : इंदौर में 8 करोड़ रुपए के पैचवर्क के बाद भी सड़कें धंस रही हैं। बापट चौराहे के पास सड़क धंसने का मामला सामने आया। 17 दिन में ये तीसरी घटना है, जो सवाल खड़े कर रही है।
Large pothole and cracked road surface in Indore
इंदौर के बापट चौराहे पर धंसी सड़क फोटो सोर्स - नवभारत
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Indore Roads Collapse : इंदौर में सड़कों की मरम्मत और निर्माण की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर नगर निगम के कामकाज पर सवाल खड़े हो रहे हैं। दावा है कि शहर की सड़कों की मरम्मत के लिए करीब 8 करोड़ रुपए खर्च कर पैचवर्क कराया गया, लेकिन इसके बावजूद कई जगह सड़कें उखड़ने और धंसने लगी हैं।

ताजा मामला बापट चौराहे के पास का है, जहां सड़क में करीब 4 से 5 फीट चौड़ा और लगभग 1 फीट गहरा गड्ढा हो गया।बड़ी बात यह है की यह पूरा घटनाक्रम जहा हुआ वही से कुछ दुरी पर जनकार्य विभाग के प्रभारी और एमआईसी मेम्बर राजेन्द्र राठौर का घर स्थित है।

जनकार्य प्रभारी के घर से कुछ दूरी पर धंसी सड़क

सबसे अहम बात यह है कि सड़क धंसने का यह घटनाक्रम नगर निगम के जनकार्य प्रभारी के घर से कुछ ही दूरी पर सामने आया है। ऐसे में सवाल यह भी उठ रहा है कि जब जिम्मेदार विभाग के प्रमुख के घर के आसपास ही सड़क की यह स्थिति है, तो शहर के दूसरे हिस्सों में सड़कों के रखरखाव और मरम्मत की निगरानी किस स्तर पर हो रही है।

सड़कों के रखरखाव की जिम्मेदारी जनकार्य विभाग की

नगर निगम में शहर की सड़कों के निर्माण, मरम्मत और रखरखाव की जिम्मेदारी जनकार्य विभाग की होती है। इसके बावजूद पैचवर्क के कुछ ही दिनों बाद सड़क का धंसना विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। सवाल यह है कि सड़क की मरम्मत के बाद उसकी गुणवत्ता की जांच किसने की और इतनी जल्दी सड़क दोबारा खराब होने पर जिम्मेदारी किसकी तय होगी।

8 करोड़ के पैचवर्क के बाद भी नहीं मिली राहत

सड़कों की मरम्मत के लिए करोड़ों रुपए खर्च किए जाने के बावजूद हालात सुधरने के बजाय कई जगह और खराब दिखाई दे रहे हैं। इंदौर में बापट चौराहे के पास पैचवर्क के कुछ ही दिन बाद सड़क का एक हिस्सा धंस गया। सड़क से गुजरने वाले वाहन चालकों को अचानक ब्रेक लगाकर गड्ढे से बचना पड़ रहा है, जिससे हादसे का खतरा बढ़ गया है।

17 दिन में तीसरा मामला, निगम की मॉनिटरिंग पर सवाल

रिपोर्ट के मुताबिक महज 17 दिनों के भीतर शहर में सड़क धंसने का यह तीसरा मामला सामने आया है। इससे सवाल उठता है कि आखिर करोड़ों रुपए के पैचवर्क के बाद सड़कें इतनी जल्दी खराब कैसे हो रही हैं, क्या काम की गुणवत्ता की सही तरीके से जांच की गई थी और क्या जिम्मेदार अधिकारियों ने ठेकेदारों के काम की मॉनिटरिंग ठीक से की?

निगम ने 70 से ज्यादा स्थान चिन्हित किए, फिर भी हालात जस के तस

नगर निगम ने खराब सड़कों का सर्वे कराया था। इसमें 70 से ज्यादा ऐसे स्थान चिन्हित किए गए, जहां हाल ही में पैचवर्क कराया गया था, लेकिन सड़कें दोबारा उखड़ गईं। रिपोर्ट के अनुसार रिंग रोड, सुमन मार्ग, एबी रोड की सर्विस रोड और अटल द्वार से लगी एमआर-10 समेत कई स्थानों पर सड़क की स्थिति खराब है।

ड्रेनेज और बारिश के बाद सड़कें टूटने का सिलसिला

गोरा कुंड चौराहे के पास भी ड्रेनेज के दौरान सड़क टूटने का मामला सामने आया था। तेज बहाव के साथ पानी सड़क पर फैलने के बाद सड़क का हिस्सा टूट गया और बड़ा गड्ढा बन गया। वहीं गाड़ी अड्डा क्षेत्र में भी सड़क का एक हिस्सा अचानक धंस गया था।

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15 साल पुराने ड्रेनेज की खुदाई के बाद भी नहीं हुआ स्थायी समाधान

गाड़ी अड्डा क्षेत्र में सड़क धंसने के बाद निरीक्षण करने वाली टीम ने गड्ढे को भरने के लिए मिट्टी डालने की बात कही थी। बताया गया कि यहां करीब 15 साल पहले ड्रेनेज को लेकर खुदाई हुई थी, लेकिन सड़क का स्थायी रेस्टोरेशन नहीं कराया गया।

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