

Operation Matrix Indore: अंतरराज्यीय साइबर धोखाधड़ी के खिलाफ इंदौर अपराध शाखा ने ऑपरेशन मैट्रिक्स के तहत बड़ी कार्रवाई की थी। पुलिस ने साइबर धोखाधड़ी के मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया था, अब मामल में पूछताछ के दौरान कई खुलासे हो रहे है ।
पूछताछ में टेलीग्राम के जरिए संचालित कथित चीनी चैनल और समूहों का भी जिक्र सामने आया है। पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने बताया कि बैंक खातों से जुड़ी जानकारी जैसे खाता नंबर, आईएफएससी कोड, इंटरनेट बैंकिंग लॉगिन जानकारी और पंजीकृत मोबाइल नंबर हासिल कर संबंधित लोगों तक पहुंचाई जाती थी। पुलिस अब इन बातों की जांच कर रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि इस नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल हैं।
जांच के दौरान यूको बैंक की महू शाखा से जुड़े एक म्यूल बैंक खाते में 5 करोड़ रुपए से अधिक के संदिग्ध लेन-देन सामने आए हैं। पुलिस के मुताबिक इस खाते से मध्य प्रदेश के अलावा भी देश के अलग-अलग राज्यों में दर्ज साइबर धोखाधड़ी की दर्जनों शिकायतों का संबंध मिला है। तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, गुजरात, उत्तराखंड, दिल्ली, महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा, झारखंड, गोवा, ओडिशा, उत्तर प्रदेश और बिहार समेत कई राज्यों से इस खाते से जुड़ी शिकायतें सामने आई हैं।
पूछताछ में कई बड़े खुलासे हुए, पुलिस के अनुसार ऐप-रिलीज, सोलएसएमएस और ड्रीमपे जैसे विशेष ओटीपी ऐप का इस्तेमाल किया जाता था। आरोपियों के मुताबिक इन ऐप की एपीके फाइल कथित तौर पर चीनी कंपनी की ओर से उपलब्ध कराई जाती थी। संबंधित सिम जिस मोबाइल में लगी होती थी, उसी मोबाइल में ऐप को संचालित किया जाता था। पुलिस के अनुसार आरोपियों ने बताया कि ऐप का सर्वर ऑनलाइन रहने के दौरान बैंकिंग लेन-देन के लिए आने वाले ओटीपी संबंधित संचालक तक पहुंचते थे और इसके बाद खाते से लेन-देन किए जाते थे।
पूछताछ में सामने आया कि कथित तौर पर प्रत्येक बैंक खाते के लिए अलग पहचान संख्या का इस्तेमाल किया जाता था। आरोपियों द्वारा इंटरनेट बैंकिंग के जरिए बैंक विवरण और लेन-देन की जानकारी भी जांचे जाने की बात सामने आई है। पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि गेमिंग से जुड़े भुगतान के लिए व्यापारी क्यूआर कोड का इस्तेमाल किया जाता था।
इंदौर पुलिस की पूछताछ में आरोपी ने करीब चार कंपनियों के संपर्क में होने की बात बताई है। आरोपी के अनुसार प्रत्येक कंपनी में करीब 8 से 10 एजेंट काम करते हैं। जांच एजेंसियां अब आरोपियों के मोबाइल फोन, सिम कार्ड, बैंक खातों और टेलीग्राम कनेक्शन की पड़ताल कर रही हैं, ताकि पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ी जा सकें।