

Indore Traders Protest : यूपीआई मर्चेंट शुल्क के विरोध में इंदौर के व्यापारियों ने बुधवार 23 सितंबर को अनोखे अंदाज में विरोध दर्ज कराया। ‘नो यूपीआई डे’ के तहत 125 व्यापारिक संगठनों से जुड़े व्यापारी अपने प्रतिष्ठानों में इस्तेमाल होने वाले यूपीआई बारकोड बॉक्स लेकर राजबाड़ा पहुंचे। यहां सभी बारकोड बॉक्स को एक जगह रखकर व्यापारियों ने सामूहिक रूप से प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया।
अहिल्या चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के आह्वान पर आयोजित प्रदर्शन में अलग-अलग बाजारों और व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। व्यापारी अपने साथ दुकानों पर रखे यूपीआई क्यूआर कोड वाले बारकोड बॉक्स लेकर पहुंचे। इन्हें राजबाड़ा पर एक साथ रखकर व्यापारियों ने संदेश दिया कि वे प्रस्तावित मर्चेंट शुल्क को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज करा रहे हैं।
नो UPI डे को लेकर व्यापारी संगठनों ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध डिजिटल भुगतान या यूपीआई व्यवस्था के खिलाफ नहीं है। उनका कहना है कि यूपीआई आज कारोबार का अहम हिस्सा बन चुका है, लेकिन मर्चेंट शुल्क लागू होने से खासतौर पर कम मार्जिन वाले कारोबार पर अतिरिक्त लागत का असर पड़ सकता है। व्यापारियों ने सरकार और संबंधित संस्थाओं से शुल्क व्यवस्था पर पुनर्विचार की मांग की।
मौजूदा घोषित व्यवस्था के मुताबिक 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा Person-to-Merchant UPI लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत Merchant Discount Rate (MDR) लागू होगा। ₹75,000 या उससे अधिक के लेन-देन पर MDR की अधिकतम सीमा ₹300 रखी गई है। उपभोक्ताओं से यह शुल्क लेने की अनुमति नहीं है।
व्यापारियों का कहना है कि कई कारोबार में पहले से ही मार्जिन सीमित है। ऐसे में डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लगने से उनकी लागत बढ़ सकती है। इसी चिंता को लेकर व्यापारिक संगठनों ने ‘नो यूपीआई डे’ के जरिए अपनी बात सामने रखी। हालांकि नए ढांचे में छोटे व्यापारियों के लिए कुछ छूट का प्रावधान भी है।
राजबाड़ा पर प्रदर्शन के साथ व्यापारियों ने सोशल मीडिया के जरिए भी ‘नो यूपीआई डे’ अभियान चलाया। व्यापारियों ने सामूहिक रूप से अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए प्रस्तावित शुल्क व्यवस्था पर चर्चा और समाधान की मांग की। राजबाड़ा पर एक साथ रखे बारकोड बॉक्स इस विरोध का प्रतीक बने।
प्रदर्शन के दौरान व्यापारियों ने अपनी समस्याएं और प्रस्तावित मर्चेंट शुल्क को लेकर चिंताएं सामने रखीं। उनका कहना है कि वे यूपीआई जैसी डिजिटल भुगतान व्यवस्था को जारी रखना चाहते हैं, लेकिन शुल्क को लेकर ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिससे व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े।