इंदौर के बेटे गौरव ने अंगदान से कई जिंदगियों को दी नई उम्मीद, ब्रेन डेथ के बाद परिवार ने लिया बड़ा फैसला

Organ Donation: इंदौर के 25 वर्षीय गौरव दवे के अंगदान से कई मरीजों को नई जिंदगी मिली। 68वें ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से हार्ट, लिवर और किडनी समय पर पहुंचाकर सफल ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया पूरी की गई।
Indore's 68th Green Corridor created for organ donor Gaurav Dave as his heart, liver and kidneys were transported for life-saving transplants, giving new hope to multiple patients.
अंगदान के लिए बनाया गया ग्रीन कॉरीडोर (फोटो सोर्स - नवभारत)
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Indore Gaurav Gives New Life Through Organ Donation: इंदौर के 25 वर्षीय गौरव दवे ने मृत्यु के बाद भी कई लोगों को नई जिंदगी देने का काम किया। ब्रेन डेथ घोषित होने के बाद उनके परिजनों ने अंगदान का निर्णय लेकर मानवता की ऐसी मिसाल पेश की, जिसने कई परिवारों के जीवन में उम्मीद की नई किरण जगा दी। गौरव के अंगों का सफल प्रत्यारोपण अलग-अलग मरीजों में किया गया।

68वां ग्रीन कॉरिडोर बना, रिकॉर्ड समय में पहुंचे अंग

अंगों को सुरक्षित और समय पर पहुंचाने के लिए इंदौर में 68वां ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। अपोलो अस्पताल से एयरपोर्ट तक और अपोलो अस्पताल से चोइथराम अस्पताल तक दो अलग-अलग ग्रीन कॉरिडोर तैयार किए गए। ट्रैफिक पुलिस की मुस्तैदी और बेहतर समन्वय के चलते जीवनदायी अंग रिकॉर्ड समय में अपने गंतव्य तक पहुंचाए गए, जिससे ट्रांसप्लांट प्रक्रिया समय पर पूरी हो सकी।

हार्ट, लिवर और किडनी से कई मरीजों को मिला नया जीवन

गौरव दवे का हार्ट अहमदाबाद भेजा गया, जहां एक जरूरतमंद मरीज का सफल ट्रांसप्लांट किया जाएगा। उनका लिवर इंदौर में प्रत्यारोपित किया गया, जबकि दोनों किडनी चोइथराम अस्पताल में दो अलग-अलग मरीजों को नई जिंदगी देने के लिए ट्रांसप्लांट की गईं। इस अंगदान से कई गंभीर मरीजों को जीवन का नया अवसर मिला।

मुख्यमंत्री की पहल पर गार्ड ऑफ ऑनर के साथ अंतिम विदाई

मध्यप्रदेश में अंगदान को प्रोत्साहित करने की पहल के तहत अंगदाताओं को सम्मान देने की परंपरा निभाई जा रही है। इसी क्रम में गौरव दवे को भी अंतिम विदाई के दौरान गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। यह सम्मान न केवल गौरव के प्रति श्रद्धांजलि था, बल्कि समाज में अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने का भी संदेश बना।

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समाज के लिए प्रेरणा बना गौरव का परिवार

गौरव दवे के परिजनों का यह निर्णय साबित करता है कि मृत्यु के बाद भी किसी की जिंदगी रोशन की जा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अधिक लोग अंगदान के लिए आगे आएं तो हजारों गंभीर मरीजों को नया जीवन मिल सकता है। इंदौर का यह 68वां ग्रीन कॉरिडोर एक बार फिर शहर की संवेदनशीलता, चिकित्सा व्यवस्था और मानवता की मिसाल बन गया।

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