इंदौर-बैतूल हाईवे बनेगा जल संरक्षण का रोल मॉडल, बारिश की हर बूंद को सुरक्षित करने वाला प्रदेश का पहला हाईवे

Indore Betul National Highway:इंदौर-बैतूल राष्ट्रीय राजमार्ग देश का पहला जल संरक्षण आधारित हाईवे बनने जा रहा है। इस परियोजना में पानी बचाने के लिए अलग अलग प्रकार के प्रयास किये गए है ।
MP Shankar Lalwani inspects the under-construction Indore-Betul National Highway
इंदौर बैतूल हाईवे का निरक्षण करते सांसद शंकर लालवानी (फोटो सोर्स - नवभारत)
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Indore Betul Highway Water Conservation Model: विकास और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संगम अब इंदौर-बैतूल राष्ट्रीय राजमार्ग पर देखने को मिलेगा। करीब 300 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहा 26 किलोमीटर लंबा यह हाईवे देश का पहला जल संरक्षण आधारित हाईवे बनने की ओर अग्रसर है। सांसद शंकर लालवानी ने साँवेर विधानसभा क्षेत्र में निर्माण कार्य का निरीक्षण करते हुए इसे भविष्य के भारत का मॉडल प्रोजेक्ट बताया।

100 फीसदी वर्षा जल संरक्षण पर फोकस

इस हाईवे की सबसे बड़ी विशेषता वैज्ञानिक जल प्रबंधन प्रणाली है। सड़क के दोनों ओर जल निकासी तंत्र, रिचार्ज पॉइंट और स्टॉर्म वॉटर चेंबर विकसित किए जा रहे हैं, ताकि बारिश का पानी व्यर्थ न बहकर सीधे भू-जल स्तर को बढ़ाने में सहायक बने। इसके अलावा हाईवे किनारे पांच बड़े तालाब तैयार किए गए हैं, जो 100 बीघा से अधिक क्षेत्र में पानी का संचयन करेंगे और आसपास के किसानों को भी लाभ पहुंचाएंगे।

विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण

सांसद लालवानी ने बताया कि परियोजना की योजना बनाते समय उन्होंने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के समक्ष जल संरक्षण और पहाड़ी क्षेत्रों के संरक्षण का प्रस्ताव रखा था, जिसे स्वीकृति मिलने के बाद इस परियोजना में शामिल किया गया।

ग्रामीणों को भी मिलेगा फायदा

सांसद शंकर लालवानी ने बताया की हाईवे पर दोनों ओर सर्विस रोड, 12 बड़े अंडरपास, 100 फीट चौड़े मार्ग, 6 बड़े पुल और 25 से अधिक पुलियों का निर्माण किया जा रहा है, जिससे ग्रामीणों और स्थानीय यातायात को सुगम बनाया जा सके।

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मालवा के विकास को मिलेगी नई रफ्तार

सांसद ने कहा कि वर्ष 2014 में देश में 91 हजार किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग थे, जो अब बढ़कर 1.47 लाख किलोमीटर से अधिक हो चुके हैं। इंदौर-बैतूल हाईवे के पूर्ण होने के बाद मालवा क्षेत्र के आर्थिक, औद्योगिक और सामाजिक विकास को नई गति मिलने के साथ यह परियोजना देश में जल संरक्षण आधारित बुनियादी ढांचे का उदाहरण बनेगी।

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