इंदौर के 7 वर्षीय अनघ चित्तौड़ा ने रचा इतिहास, तीसरी बार बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड

World Record: इंदौर के 7 वर्षीय अनघ चित्तौड़ा ने 10 मिनट 48 सेकंड में 50 संस्कृत मंत्र और श्लोक सुनाकर तीसरी बार वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया।इस उपलब्धि से इंदौर और भारतीय संस्कृति का गौरव विश्व स्तर पर बढ़ा।
Seven-year-old Indore prodigy Anagh Chittoda receives Worldwide Book of Records certificate after setting a world record by reciting 50 Sanskrit mantras and shlokas in 10 minutes 48 seconds.
अपने रिकॉर्ड के साथ अनघ (फोटो सोर्स - नवभारत )
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Indore Boy Sets Third World Record: शहर के लिए गर्व की खबर सामने आई है। इंदौर के 7 वर्षीय प्रतिभाशाली बालक अनघ चित्तौड़ा ने अपनी विलक्षण स्मरण शक्ति और संस्कृत ज्ञान के दम पर एक और विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। अनघ ने मात्र 10 मिनट 48 सेकंड में 50 संस्कृत मंत्र और श्लोक सुनाकर वर्ल्डवाइड ऑफ़ बुक रिकॉर्ड में अपना तीसरा वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज कराया है। इस उपलब्धि को 29 जून 2026 को, उनके सातवें जन्मदिन पर, आधिकारिक स्वीकृति मिली थी, जबकि रिकॉर्ड का प्रमाणपत्र हाल ही में परिवार को प्राप्त हुआ।

तीन विश्व रिकॉर्ड बनाने वाले नन्हे प्रतिभाशाली

अनघ की यह उपलब्धि केवल एक रिकॉर्ड नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, संस्कृत भाषा और श्रेष्ठ संस्कारों का वैश्विक मंच पर सम्मान भी है। इससे पहले भी अनघ दो विश्व रिकॉर्ड बना चुके हैं। पहला रिकॉर्ड उन्होंने 3 वर्ष 11 माह 13 दिन की उम्र में बनाया था, जब उन्होंने 10 करोड़ तक की 50 जोड़ी बड़ी-छोटी संख्याओं की तुलना केवल 5 मिनट 20 सेकंड में कर सभी को चौंका दिया था। इसके बाद 4 वर्ष 9 दिन की आयु में उन्होंने 3 मिनट 1 सेकंड में 50 मसालों की पहचान कर दूसरा विश्व रिकॉर्ड अपने नाम किया।

मां की मेहनत और परिवार का मिला साथ

इस असाधारण सफलता के पीछे अनघ की मां श्रद्धा चित्तौड़ा की वर्षों की मेहनत और समर्पण है। उन्होंने अनघ के केवल दो वर्ष की उम्र से ही संस्कृत श्लोकों का नियमित अभ्यास शुरू कराया। पिता प्रणय चित्तौड़ा ने भी हर कदम पर प्रोत्साहन और सहयोग दिया। वहीं दादा-दादी तथा नाना-नानी के सामूहिक प्रयासों ने इस उपलब्धि को संभव बनाया।

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इंदौर के लिए गौरव का क्षण

लगातार तीन विश्व रिकॉर्ड बनाकर अनघ चित्तौड़ा ने न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे इंदौर और मध्यप्रदेश का नाम रोशन किया है। इतनी कम उम्र में भारतीय संस्कृति और संस्कृत भाषा को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने वाली यह उपलब्धि अन्य बच्चों के लिए भी प्रेरणा बन गई है। परिवार ने अनघ के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि वह आगे भी ज्ञान, संस्कार और भारतीय परंपरा का गौरव विश्वभर में बढ़ाते रहें।

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